अभी कुछ महीने पहले ही ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनीश के एक अस्पताल में 24 घंटे के भीतर 11 बच्चों की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी। इन मौतों के बाद देश के स्वास्थ्य मंत्री अब्लदु-रऊफ अल-शरीफ ने इस्तीफा दे दिया था।

भारत में भी चमकी बुखार यानी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। लेकिन यहां स्वास्थ्य मंत्री इन मौतों की ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने के बजाए पार्टी करते नज़र आ रहे हैं। पार्टी भी कोई मामूली नहीं। पार्टी के आयोजक हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो ख़ुद को देश का सेवक बताते हैं। लेकिन मुज़फ्फरपुर में कई दिनों से जारी बच्चों की मौतों के बावजूद उन्होंने मुज़फ्फरपुर पहुंचकर अस्पताल और स्वास्थ्य व्यवस्था का जाएज़ा नहीं लेते।

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वह मुज़फ्फरपुर में हो रही बच्चों की मौतों पर चिंता जताने के बजाए दिल्ली के अशोका होटल में नवनिर्वाचित सांसदों के लिए डिनर पार्टी का आयोजन करते हैं। उनकी इस डिनर पार्टी में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे भी मौजूद रहते हैं। वह मुज़फ्फरपुर में हो रही मौतों पर रोकथाम के लिए ज़रूरी कदम उठाने के बजाए पीएम मोदी की पार्टी का लुत्फ़ लेते नज़र आते हैं।

वहीं बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बच्चों की मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए पीएम मोदी की डिनर पार्टी में शामिल होने से मना कर देती है। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि सत्तारूढ़ पार्टी होने के बावजूद बीजेपी बच्चों की मौतों पर ज़रा भी संवेदना नहीं दिखाती और डिनर पार्टी का कार्यक्रम स्थगित नहीं करती।

हैरानी तो इस बात पर भी है कि इस पार्टी का आयोजन ख़ुद को प्रधान सेवक बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या पीएम मोदी की यह पार्टी बच्चों की जान से ज़्यादा अहम थी, जिसे फिलहाल के लिए स्थगित नहीं किया जा सकता था?

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सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के इस अंसंवेदनशील रवैये के लिए उनकी जमकर आलोचना हो रही है। राव दीपक नाम के एक फेसबुक यूज़र ने इसपर तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा, “अस्पताल में 11 बच्चों की मौत हो जाने पर ट्यूनीशिया के स्वास्थ्य मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया। बिहार में 600 बच्चों की मौत के बाद भारत के प्रधानमंत्री ने पांचसितारा होटल में भोज दिया। नये भारत में स्वागत है”।