सबसे पहले ये समझिए कि ‘ईवीएम’ इंसान है या इलेक्ट्रॉनिक मशीन? ज़ाहिर है EVM एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है। ये सवाल इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि आजकल ईवीएम को ‘गर्मी’ लग जाती है! ये बात हम नहीं बल्कि चुनाव आयोग के अधिकारी इस बात का दावा कर रहे हैं।

ये कितना हास्यपद है कि चुनाव आयोग के अधिकारी EVM से धांधली करने और कथित सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को फायदा पहुँचाने पर ऐसे बहाने बनाने लगते हैं।

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लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के बाद पूरे देश से EVM से छेड़छाड़ करने की वीडियो और खबरें वायरल हो रही हैं। यूपी के झांसी, मेरठ, चंदौली, गाजीपुर और बिहार के सारण, महाराजगंज से ईवीएम में धांधली करने का मामला सामने आ रहा है। फर्जी तरीके से बिना सुरक्षा के ट्रकों में ईवीएम मशीन लादकर स्ट्रांग रूम में पहुंचाई जा रही हैं।

आरोप है और ये वायरल हो रही वीडियो में देखा भी जा रहा है कि ईवीएम मशीनों को स्ट्रांग रूम तक पहुँचाने में बीजेपी कार्यकर्ताओं की जिला प्रशासन और चुनाव आयोग के अधिकारी मदद कर रहे हैं। इसके साथ ही ईवीएम और चुनाव आयोग दोनों की विश्वसनीयता पर सवाल और भी गहरा होता जा रहा है।

दूसरी बात ये है कि जब 19 मई को लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान ख़त्म हुए तो नियम के मुताबिक सभी ईवीएम मशीनों पर मुहर लगाकर सुरक्षा घेरे में लेते हुए उसे स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाए।

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लेकिन यहां मामला उल्टा ही है। चुनाव ख़त्म हो गया ईवीएम स्ट्रांग रूम में पहुँच भी चुकी हैं। तो फिर ये ईवीएम मशीनें कहां से निकल रही हैं जो झांसी, मेरठ, चंदौली, गाजीपुर और बिहार के सारण से लेकर महाराजगंज में ट्रकों में घूम रही हैं?

क्या एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन का स्ट्रांग रूम में दम घुट सकता है? क्या एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन को धूप में गर्मी लग सकती है? क्या EVM को गर्मी लग रही है इसीलिए वो ट्रकों में बाहर घूमने के लिए निकली है? चुनाव आयोग और मोदी सरकार भले ही शुतुर्मुर्ग की तरह गर्दन ज़मीन में गाड़कर अंजान बनने का ढोंग करे, लेकिन इस देश की जनता समझदार है वो सबकुछ देख और समझ रही है।

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