झारखंड में तबरेज नाम के एक युवक को बांधकर पीटा गया

उससे जय श्री राम और जय हनुमान के नारे लगवाए गए

वह मर गया

मैं नहीं समझ पा रहा कि अगर कोई मुसलमान जय श्री राम या जय हनुमान बोल देगा तो क्या उससे राम और हनुमान की जय हो जाएगी ?

और अगर मुसलमान जय नहीं बोलेगा तो क्या राम और हनुमान हार जाएंगे ?

क्या राम और हनुमान की जीत के लिए मुसलमानों का जय बोलना जरूरी है ?

क्या राम और हनुमान इतने कमजोर है कि मुसलमानों के समर्थन के बिना वह हार सकते हैं ?

मुझे लगता है कि दरअसल हम भीतर से बहुत कमजोर लोग हैं ?

हम जब पैदा हुए तो हमें मां बाप से एक धर्म मिल गया

इस धर्म को बनाने में हमारा कोई योगदान नहीं है

हमें यह भी नहीं पता पता कि हमारे धर्म की बातें सही है या गलत?

हम कभी जानने की हिम्मत ही नहीं करते

लेकिन हम खुद को सही साबित करने के लिए यह बताना चाहते हैं कि जिस घर में हम इत्तेफाक से पैदा हो गए वहीं दुनिया का सबसे अच्छा धर्म है

और वह अच्छा तभी साबित होगा जब दूसरे धर्म वाला हमारे धर्म के महान होने का सर्टिफिकेट देगा

और दूसरे धर्म वाला अपने ही धर्म को अच्छा मानकर अपने धर्म को सर्टिफिकेट देना चाहता है

तो हम किसी भी दूसरे धर्म के कमजोर व्यक्ति को पकड़कर पीट पीट कर अपने धर्म के लिए एक सर्टिफिकेट बनवाना चाहते हैं

कि तू हमारे राम जी की हनुमान जी की जय बोल दे तो हमें तेरा सर्टिफिकेट मिल जाएगा कि हमारे भगवान तेरे वाले अल्लाह से ज्यादा महान है

और क्योंकि मेरे वाले भगवान तेरे अल्लाह से ज्यादा महान है इसलिए इसलिए हम ज्यादा अच्छे ऊंचे और सही है

और क्योंकि हम सही हैं इसलिए तुम गलत हो

इस तरह दूसरे धर्म वाले को पीट-पीटकर मिले हुए सर्टिफिकेट से हम बिना कोई अच्छा काम किए महान बन जाते हैं

यह एक मूर्खता से भरी हुई क्रूर और परले दर्जे की बेवकूफी की हरकत है

चिंता की बात यह है कि इस समय जो सत्ता में गुंडे बैठे हैं

वे लोग इस तरह की मारकाट को बढ़ावा देना चाहते हैं

ताकि देश में मुद्दों की बात गायब हो जाए और मेरा धर्म अच्छा हम अच्छे दूसरे खराब वाली होड में जनता फंसी रहे

और इस बीच सत्ता में बैठे हुए यह गुंडे लोग पूंजीपतियों की फायदे के लिए काम करते रहे