दो ट्रेनों और 6 हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने के बाद अब मोदी सरकार महारत्न कंपनी- स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के तीन प्लांट निजी कंपनियों को बेचने की तैयारी में जुट गई है।

बताया जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला विनिवेश को बढ़ावा देने के लिए लिया है। सरकार नोटबंदी और जीएसटी के बाद विनिवेश के मोर्चे पर पिछड़ गई थी। जिससे उबरने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। जिन तीन प्लांट्स को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है उनमें पश्चिम बंगाल स्थित सेल का अलॉय स्टील प्लांट, तमिलनाडु स्थित सलेम स्टील प्लांट और कर्नाटक के भद्रावती स्थित विश्वेश्वरैया ऑयरन एंड स्टील प्लांट शामिल है।

इन तीनों प्लांट में 100% हिस्सेदारी बेची जाएगी। ये प्लांट दो अलग-अलग चरणों में बेचे जाएंगे। इन प्लांटो की बिक्री नीलामी के ज़रिये हो सकती है। 8 अगस्त, 2019 को उन निजी कंपनियों की घोषणा की जाएगी जिन्हें ये प्लांट दिए जाने हैं।

ग़ौरतलब है कि विनिवेश का आधार यह होता रहा है कि जो सरकारी उपक्रम लगातार नुकसान में चल रहे हैं, उन्हें बेच दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह स्टील प्लांटस घाटे में चल रहे हैं, इसी वजह से इन्हें निजी हाथों में दिया जा रहा है।

नवजीवन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों प्लांट्स की बैलेंस शीट बताती है कि 2017 में नीति आयोग के विनिवेश के प्रस्ताव के बाद से ही इन प्लांट्स के मुनाफे में कमी आई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या जानबूझकर इन प्लांट्स को बेचे जाने के इरादे से इनके मुनाफ़े में कमी की गई है?

बता दें कि इन तीनों प्लांट्स को बेचे जाने की चर्चा 2016 से ही हो रही है। नीति आयोग ने 2 अगस्त, 2016 को एक रिपोर्ट जारी की जिसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों के विनिवेश की सलाह दी गई। नीति आयोग ने सलाह दी कि इन तीनों प्लांटों के प्रबंधन निजी हाथों को सौंप दिए जाएं।

27 अक्टूबर, 2016 को कैबिनेट कमेटी ने नीति आयोग के इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी। प्रस्ताव जब सेल के पास पहुंचा तो 11 अगस्त, 2017 को सेल बोर्ड ने तीनों स्पेशल प्लांट में 100 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश को मंजूरी दे दी।