देश में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगा है। पंजाब नेशनल बैंक हो या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया इन दोनों बैंकों में एक को 25 हजार करोड़ और दूसरे को 46 हजार करोड़ का चुना लगा है। यही नहीं सार्वजनिक क्षेत्र के 20 बैंकों का अबतक करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये डूब चुका है।

इस बात की जानकारी खुद मोदी सरकार ने दी है। जहां कर्ज लेकर चुकाने वाले जानबूझकर अपना कर्ज नहीं चुका रहे है। अबतक बैंक 63 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज बांट चुका है। मगर ऐसे बड़े कर्जदार जो पैसा नहीं लौटा रहें है उनका सरकार नाम सार्वजनिक करने से साफ़ मना कर चुकी है।

सोमवार 15 जुलाई को लोकसभा में एक सांसद ने बैंक में डूबते पैसों पर सवाल किया था। सवाल था की सरकारी क्षेत्र के बैंकों का मौजूदा समय में कितना कर्ज फंसा हुआ है? वहीं सांसद ने पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का लोन लेकर न चुकाने वालों के नामों की सूची भी मांगी थी। साथ ही ये भी पूछा था की इसमें उस धनराशि का आंकड़ा क्या है, जिसे कर्जदाताओं ने जानबूझकर नहीं चुकाया।

मगर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बड़े कर्जदाताओं का नाम देने से इनकार कर दिया। ठाकुर ने इसके पीछे 1934 में बने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम का हवाला दिया। मगर उन्होंने कर्ज की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक की 31 मार्च 2018 तक बैंकों ने कुल 63,82,461 करोड़ दिए थे। वहीं जब लोन वापस देने की बात सामने आई तो वित्त राज्य मंत्री के अनुसार कर्ज देने इरादतन चूक की गई। इसका मतलब ये की 31 मार्च 2019 तक एक लाख 49 हजार 684 करोड़ रुपये कर्जदाताओं ने जानबूझकर पैसा नहीं चुकाया।

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर उन बैंकों का आकड़ा जारी करते हुए जानकारी दी जिनमें  जानबूझकर लोन वापस नहीं किया गया है।

इनमें भारतीय स्टेट बैंक में 46,158 करोड़, पीएनबी का 25,090 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा का 9,738, बैंक ऑफ इंडिया का 9890 करोड़ रुपये, इलाहाबाद बैंक का 4,445,केनरा बैंक का 4,964, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का का 6,163 करोड़ रुपये इरादतन चूक यानी की जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाया गया है।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यस्था बनने का लक्ष्य कैसे प्राप्त करेगी? क्योंकि अगर कर्ज लेने वाले कर्ज जानबूझकर नहीं चुकायेंगे तो ऐसे में सरकार को बैंकों में वापस डालना होगा।

ऐसे में साल 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का जो अनुमान लगाया है। उसे भी हासिल करने में सरकार को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार को चाहिए की वो ऐसे बड़े कर्जदारों पैसे वापस लें नहीं तो पीएम मोदी के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यस्था बनने के सपने पर पानी फेर सकता है।