बिहार में एक तरफ चर्चा हो रही थी कि लालू यादव और नीतीश कुमार साथ आ सकते हैं तो दूसरी तरफ चर्चा हो रही थी कि जातिवार जनगणना पर भारतीय जनता पार्टी का घेराव होने जा रहा है। मगर इन चुनौतियों से निपटने के लिए शायद केंद्र सरकार ने भरपूर तैयारी कर ली है।

अब नई खबर यह है कि लालू प्रसाद यादव और उनके सगे संबंधियों के कई ठिकानों पर सीबीआई ने छापा मारा है। खबरों के मुताबिक लालू यादव और राबड़ी देवी और मीसा भारती के दिल्ली गोपालगंज और पटना स्थित लगभग 17 ठिकानों पर छापेमारी की गई है।

पुराने आरोपों के साथ-साथ लालू यादव पर रेलवे संबंधित घोटाले के नाम पर नए आरोप लगाए हैं। गौरतलब है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अभी कुछ ही दिन पहले जेल से रिहा होकर घर आए हैं। उनके आते ही संभावना जताई जा रही थी कि भारतीय जनता पार्टी के देशव्यापी घेराव के लिए एक मजबूत फ्रंट बनाया जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी कि बिहार में जेडीयू और आरजेडी एक साथ आ सकते हैं। इस तरह की घेराबंदी और मोर्चाबंदी की संभावना को तब और बल मिल गया, जब तेजस्वी यादव ने जातिवार जनगणना के लिए सड़कों पर एक बड़े आंदोलन की घोषणा कर दी।

सांप्रदायिकता की पिच पर शानदार बैटिंग करने वाली भारतीय जनता पार्टी सामाजिक न्याय संबंधी मुद्दों पर जैसे डिफेंसिव रहती है वैसे ही बचकर निकल गई, मगर कहा जा सकता है कि कुछ दिनों बाद ही केंद्र की सरकार ने लालू यादव के परिवार पर पलटवार किया है।

इन छापों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरजेडी ने ट्विटर पर लिखा : ” जिस लालू जी ने रेलवे को 90,000 करोड़ का मुनाफा दिया,जिस लालू ने लाखों युवाओं के लिए रेलवे में भर्ती निकाली,कुलियों को स्थायी किया उस लालू पर 15 साल बाद छापा मरवाया जा रहा है। और जिस संघ व मोदी-शाह ने रेलवे को बेच दिया, स्टेशन बेच दिए, 72000 पदों को डकार गए वो ईमानदार बन रहे है।”

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