retail inflation
Retail Inflation
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मोदी सरकार में एक के बाद एक अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर डराने वाली खबरें आ रही हैं। मोदी सरकार तमाम दावों के बीच महंगाई पर लगाम नहीं लगा पा रही है। दिसम्बर में खुदरा महंगाई दर में फिर भारी बढ़ोत्तरी हुई है। दिसम्बर में खुदरा महंगाई दर 7.35 फीसदी हो गई है, जबकि यही महंगाई दर एक महीने पहले नवंबर में 5.54 फीसदी थी। खाने-पीने की चीजों के महंगे होने से ये बेतहाशा महंगाई बढ़ी है।

इसके अलावा खाद्य महंगाई दर में बभी साल के आखिरी महीने में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। नवंबर में खाद्य महंगाई दर 10.01 फीसदी थी। जो दिसम्बर में बढ़कर 14.12 फीसदी हो गई। जुलाई 2016 के बाद दिसम्बर 2019 ऐसा पहला महीना है जब महंगाई दर रिज़र्व बैंक अपर लिमिट (2-6 फीसदी) को भी पार कर गया है।

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बता दें कि अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर 4.62 फीसदी थी, जो नवंबर में बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई। जबकि सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 3.99 फीसदी थी। लेकिन अब मोदी सरकार लगातार महंगाई के मोर्चे पर फेल हो रही है। विपक्षी दल बीजेपी और मोदी सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार का महंगाई, अर्थव्यवस्था, नौकरी पर ध्यान नहीं है इसीलिए वो राम मंदिर, कैब, एनआरसी जैसे मुद्दों में उलझाए हुए है।

गौरतलब है कि पूरे देश में प्याज रिकॉर्ड महंगे दाम पर बिक रहा है। प्याज 150 रुपये किलो तक बिका है, इसके साथ ही टमाटर, आलू और अन्य सब्जियों की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आया है। पेट्रोल और डीजल के दामों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। यही कारण है कि देश में महंगाई दर लगातार बढ़ रही है।

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एक तरफ देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही है। 11 साल में देश की अर्थव्यवस्था सबसे कम महज 4।5 फ़ीसदी हो गई है। बेरोजगारी 45 साल में सबसे ज्यादा है, प्याज 150 रुपये किलो बिका, सरकरी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल बिकने की कगार है। लेकिन मोदी सरकार देश इसे रोकने में नाकाम साबित हो रही है। साथ ही महंगाई के बीच सरकार जिस तरीके से एनआरसी जैसे मुद्दों को हवा दे रही है इससे पता चलता है कि मोदी सरकार की प्राथमिकता क्या है!

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