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आज तारीख़ है 3 जनवरी। आज ही के दिन साल 1831 में जन्म लिया था देश के पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने। वो न सिर्फ़ शिक्षिका और समाजसेविका थी बल्कि, विद्रोही कवित्रि और लेखिका भी थीं। उनकी लेखनी में स्त्री-पुरुष असमानता और मनुवाद-ब्राह्मणवाद पर करारा प्रहार देखने को मिलता है।

औरतों के लिए लिखी उनकी एक कविता की कुछ पक्तियाँ-

पौ फटने से गोधुली तक, महिला करती श्रम

पुरुष उसकी मेहनत पर जीता है, मुफ्तखोर

पक्षी और जानवर भी मिलकर काम करते हैं

क्या इन निकम्मों को मनुष्य कहा जाए?

इसी तरह मनुवाद पर वो लिखती हैं कि-

शूद्रों का दर्द

दो हज़ार वर्ष से भी पुराना है

ब्राह्मणों के षड्यंत्रों के जाल में

फंसी रही उनकी सेवा

हिंदू धर्म के कर्मकांडो-पाखंडों पर सावित्रीबाई लिखती हैं-

पत्थर को सिंदूर लगाकर

जिसे बना दिया देवता

असल में था, वह पत्थर ही

सावित्रीबाई फुले की जयंती पर तमाम जाने-मानें लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है-

राजद नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ट्वीटर पर लिखते हैं-

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार मौजूदा दौर में सावित्रीबाई की ज़रूरत महसूस करते हुए लिखते हैं-

आज जब कॉलेज-विश्वविद्यालयों से लेकर सड़कों तक हर जगह लड़कियों की आज़ादी पर ख़तरा मँडरा रहा है तब सावित्रीबाई फुले के संघर्ष को याद करके हमें प्रेरणा और सही दिशा मिलती है। लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोलने के लिए उन्होंने उन्नीसवीं सदी में कई तकलीफ़ों का सामना किया। कभी कीचड़ फेंककर उनके कपड़ों को गंदा किया जाता था तो कभी उन्हें गालियाँ दी जाती थीं।

आइए, हम सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाते हुए उनके सपनों का भारत बनाने के लिए एकजुट हो जाएँ।

कवि कुमार विश्वास उन्हें माँ की उपाधि देते हुए कहते हैं कि-

बीजेपी के ट्वीटर हैंडल से भी सावित्रीबाई फुले को याद किया गया, लेकिन पाखंड के ख़िलाफ़ लिखने वाली सावित्रीबाई को भी बीजेपी भगवा रंग रंगने से बाज़ नहीं आई-

सपा नेता डिम्पल यादव ने भी उन्हें याद किया-

इसके अलावा शिवराज सिंह चौहान, संजय निरुपम, रणदीप सुरजेवाला, मनोहरलाल खट्टर, भूपेश बघेल आदि लोगोंल ने भी सावित्रीबाई फुले



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