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उत्तर प्रदेश में किस तरह से पुलिस दलितों और मुसलमानों को टार्गेट कर रही है, इसका अंदाज़ा पिछले साल 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान मारे गए दलित युवक के पिता के दावों से साफ़ तौर पर लगाया जा सकता है।

मुजफ्फरनगर स्थित गोडला गांव के रहने वाले सुरेश कुमार का दावा है कि उनके बेटे को एक पुलिस अधिकारी ने गोली मार दी और बदले में उनसे कहा गया कि वह उनके बेटे के हत्यारे के रूप में किसी भी मुस्लिम शख्स का नाम ले लें। इसके बदले में उन्हें दस लाख रुपए दिए जाएंगे।

सुरेश कुमार ने यूपी पुलिस पर यह संगीन आरोप रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लगाए। इस कार्यक्रम का आयोजन भीम आर्मी के संगठन सत्यशोधक संघ द्वारा पिछले साल 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान मारे गए दलितों की याद में किया गया था।

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कार्यक्रम में पहुंचे कई पीड़ितों ने इस दौरान अपनी आप बीती सुनाई। सुरेश कुमार ने भी इस दौरान अपने दर्द को बयां किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान उनके 22 वर्षीय बेटे अमरेश को एक पुलिस अधिकारी ने सीने पर गोली मार दी थी। जिससे उसकी मौत हो गई।

सुरेश ने बताया कि जब उन्होंने मुआवज़े की अपील की तो मेरे बेटे की हत्या का आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर  उन्हें  मंडी पुलिस स्टेशन उठाकर ले आया। सुरेश कहते हैं, ‘उन्होंने मुझसे बेटे के हत्यारे के संदिग्ध के रूप में किसी भी मुस्लिम शख्स का नाम लेने का दबाव बनाया और कहा कि अगर मैं ऐसा करता हूं तो इसके बदले में मुझे दस लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। लेकिन मैंने इनकार कर दिया।

सुरेश ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस की पेशकश को मानने से इनकार कर दिया तो उसे जातिगत गालियां दी गईं, बाहरी व्यक्ति कहा गया। इसके साथ ही उसे थाने में पीटने की धमकी दी गई।

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इसपर लेखक एवं समाजसेवी डॉ. राम पुनियानी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्विटर के ज़रिए बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “दलित शख्स का दावा: बेटे को पुलिस ने मारी गोली, मुझसे कहा- किसी मुस्लिम का नाम ले लो, 10 लाख मिलेंगे

पुलिस ‘एक तीर से दो निशाने’ लगा रही है! दलितों को गोलियों से मारने के बाद इल्ज़ाम मुसलमानों पर डाल रही है! ये सारा खेल संघी सरकार के इशारे पर चल रहा है”!

गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में दलितों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के दौरान पुलिस गोलीबारी में दस लोगों की मौत हो गई और हज़ारों की तादाद में लोग घायल हो गए थे। ये लोग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट के बदलाव के खिलाफ विरोध कर रहे थे।

विरोध के दौरान एक बच्ची की मौत जलती बाइक में गिरने की वजह से हो गई थी। इसके अलावा दो लोगों की मौत कथित तौर पर ऊंचि जाति द्वारा दो दिन बाद हिंसा में हो गई थी।