Nagaland Rahul Amit Shah

पूर्वोत्तर भारत के राज्य नागालैंड में शनिवार रात सुरक्षाबलों की फायरिंग में 13 ग्रामीणों की मौत हो गई। सेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया है, तो वहीं मुख्यमंत्री नेफियू रियो और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे मामले पर उच्चस्तरीय जांच की बात कही है। हालाँकि, इस जांच से बेगुनाहों की मौत की भरपाई नहीं की जा सकती।

दरअसल, सेना का दावा है कि उन्होनें उग्रवादियों की संभावित गतिविधि की सूचना मिलने पर ‘कार्रवाई’ की। लेकिन उनकी इस गलती के कारण 13 मासूमों की जान चली गई। सेना का दावा है कि इसमें एक जवान की भी मौत हुई है। ये मामला मोन ज़िले के ओटिंग के तिरू गांव का है।

मुख्यमंत्री रियो ने ‘सेना की कार्रवाई’ की निंदा करते हुए अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “ओटिंग, मोन में नागरिकों की हत्या की दुर्भाग्यपूर्ण घटना अत्यंत निंदनीय है। उच्च स्तरीय एसआईटी  इस मामले की जांच करेगी और कानून के अनुसार न्याय होगा। सभी वर्गों से शांति की अपील।”

गृह मंत्री अमित शाह ने इस पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई है, उनके परिजनों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। राज्य सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय एसआईटी इस घटना की गहन जांच करेगी ताकि शोक संतप्त परिवारों को न्याय सुनिश्चित किया जा सके।”

नागालैंड में सेना से हुई नागरिकों की “हत्या” पर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए जवाब माँगा है। उन्होनें कहा, “यह हृदय विदारक है। भारत सरकार को जवाब देना ही होगा। गृह मंत्रालय आखिर कर क्या रहा है, देश में न तो नागरिक सुरक्षित हैं और न ही सुरक्षाकर्मी?

नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री टी.आर. ज़ेलियांग ने इस घटना की निंदा की है। उन्होनें ट्वीट कर लिखा, “मैं ओटिंग, मोन में हुई बेगुनाहों की हत्याओं की निंदा करता हूँ। इस नरसंहार के लिए कोई बहाना नहीं दिया जा सकता। रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक जाँच आयोग को तुरंत गठित किया जाए और इसमें शामिल सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई हो।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये घटना चार दिसंबर की शाम करीब चार बजे हुई। इसमें मारे गए लोग एक मिनी पिकअप ट्रक में कोयला खदान से घर लौट रहे थे। वो ड्यूटी पर जाने से पहले अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने के लिए घर आ रहे थे। पीड़ितों के घर न लौटने पर गांववालों ने उन्हें खोजना शुरू किया, लेकिन उन्हें केवल अपने परिजनों की लाश मिली। ये मामला केवल सेना की लापरवाही से हुई आम नागरिकों की मौत का नहीं है, ये मामला सरकार के झूठे दावों के पर्दाफाश होने का भी है। क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी अक्सर दावा करते हैं कि उनके शासन में देश सुरक्षित है। यहाँ तो आम जनता सुरक्षाबलों से ही सुरक्षित नहीं है।

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