काफ़ी संघर्ष के बाद आखिरकार कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी शनिवार को सोनभद्र नरसंहार के पीड़ितों से मुलाकात करने में कामयाब हुईं। इस दौरान उन्होंने पीड़ितों के आंसू पोंछते हुए उन्हें कांग्रेस की ओर से 10 लाख रुपए मुआवज़ा देने का ऐलान किया।

पीड़ितों से मुलाकात के बाद प्रियंका ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरा मकसद पूरा हो गया, क्योंकि मैं पीड़ितों से मिल चुकी हूं। फिर भी मैं हिरासत में हूं, देखिए अब प्रशासन क्या कहेगा। कांग्रेस घटना में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 10 लाख रुपए का मुआवजा देगी।”

इस दौरान सूबे की योगी सरकार को घेरते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा, “प्रशासन को इनकी (पीड़ितों) की रखवाली करनी चाहिए। जब इनके साथ हादसा हो रहा था, मदद करनी चाहिए थी। प्रशासन की मानसिकता मेरी समझ से बाहर है। आप उन पर थोड़ा दबाव बनाइए, आप मेरे पीछे पड़े हैं।”

सोनभद्र नरसंहार : इंदिरा के रूप में दिखी प्रियंका, पीड़ित परिवारों को गले लगाकर हुईं भावुक

हैरानी की बात तो यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस हादसे की ज़िम्मेदारी लेने के बजाए इसके लिए भी कांग्रेस को ही दोषी ठहरा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इस घटना की नींव 1955 में ही पड़ गई थी, जब कांग्रेस की सरकार थी।

योगी के मुताबिक सोनभद्र के विवाद के लिए 1955 और 1989 की कांग्रेस सरकार दोषी है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत की जमीन को 1955 में आदर्श सोसाइटी के नाम पर दर्ज किया गया था। इस जमीन पर वनवासी समुदाय के लोग खेती-बाड़ी करते थे। बाद में इस जमीन को किसी व्यक्ति के नाम 1989 में कर दिया गया। 1955 में कांग्रेस की सरकार थी।

बता दें कि बीते कल सोनभद्र के पीड़ितों से मिलने जा रही प्रियंका गांधी को पुलिस ने मिर्ज़ापुर में रोक लिया था और उन्हें हिरासत में ले लिया था। प्रियंका गांधी ने तभी साफ कर दिया था कि वो नरसंहार पीड़ितों से मिले बगैर वापस नहीं लौटेंगी।