prashant kishor
Prashant Kishor

जामिया में छात्रों द्वारा कथित हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 10 गिरफ्तार लोगों में एक भी जामिया मिल्लिया इस्लामिया का छात्र नहीं है।

इन सभी गिरफ्तार लोगों का कोई न कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड है। अब सवाल है कि हिंसा सड़क पर हुई, बसें सड़क पर जलीं और उन्हें जलाने वाले जामिया के छात्र नहीं थे, तो फिर दिल्ली पुलिस जामिया के कैम्पस में घुसकर छात्रों पर लाठियां क्यों भांज रही थी?

छात्रों को लाइब्रेरी के अंदर डेस्क के नीचे शरण लिए छात्रों को बाहर खींचकर उनपर पुलिस ने लाठियां क्यों मारी? गर्ल्स हॉस्टल तक से मर्द पुलिस वालों ने क्यों लड़कियों को खींचकर उनके साथ बदतमीजी की? हॉस्टल के भीतर तक क्यों आंसू गैस के गोले दागे गए?

जामिया हिंसा मामले में 10 लोग गिरफ्तार, कोई छात्र नहीं, तो छात्रों को पुलिस ने क्यों पीटा?

इसपर जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने ट्विटर पर लिखा-

दिल्ली में हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल लोगों पर दिल्ली पुलिस कार्यवाही कर रही है और ये होना भी चाहिए। परन्तु जो हिंसा पुलिस ने जामिया विश्वविद्यालय के कैम्पस के अन्दर छात्रों पर किया, उनपर कार्यवाही कौन करेगा?#CAA2019 #NRC

गौरतलब है कि, दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस ने बल प्रयोग किया जिसके बाद इलाके में हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं। साथ ही जामिया में हुई पुलिसिया लाठीचार्ज को लेकर पूरे देश के विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन हो रहे हैं।

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, पटना यूनिवर्सिटी, मुंबई यूनिवर्सिटी, पंजाब यूनिवर्सिटी, जाधवपुर यूनिवर्सिटी, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मुंबई, आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास सहित तमाम विश्वविद्यालय जामिया के समर्थन में उतर गए हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

three × 1 =