प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया में उलटबाँसी हर तरफ गायी जा रही है। इस न्यू इंडिया में पढ़ लिखकर नौकरी मांगने वालों पर लाठियों, गोलियों और आंसू गैस के गोलों की बौछार की जा रही है। लेकिन अगर आप कोई साम्प्रदायिक राजनेता है या धर्म विशेष और देश के राष्ट्रपिता को अपशब्द कहते है तो पुलिस द्वारा आपको सुरक्षा और सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद दिया जाएगा।

लेकिन सरकार द्वारा सभी को एक नज़र से देखा जा रहा है। हक मांगने वालों को दंगाई समझा जा रहा है। NTPC के परिणामों में हुई धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को यूपी और बिहार की पुलिस खोज-खोजकर पीट रही है। पटना से लेकर प्रयागराज की गालियों तक में अभ्यार्थियों को अपराधी की तरह दौड़ाकर मारा जा रहा है।

छात्रों को सरायों को निशाना बनाया जा रहा है। लॉज की तलाशी ली जा रही है। बंदूक से दरवाजे तोड़े जा रहे हैं। ऐसा लग रहा पुलिस अभ्यार्थी नहीं आतंकी ढूंढ़ रही है। जो छात्र प्रदर्शन में गए भी नहीं थे उनको भी हॉस्टल्स से निकालकर पिटा गया है।

वही दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन का कहना है कि छात्रों ने रेलवे पटरियों को जाम कर दिया था, जिस कारण रेल यातायात बाधित हो गया। छात्रों को पटरी से उठाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा। इसी बीच प्रयागराज पुलिस का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस छात्रों को हॉस्टल के कमरों से जबदस्ती निकाल कर पीट रही है। हिरासत में ले रही है। ऐसी ही एक वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस महासचीव प्रियंका गांधी ने लिखा है “प्रयागराज में पुलिस द्वारा छात्रों के लॉज में और हॉस्टलों में जाकर तोड़-फोड़ करना एवं उनको पीटना बेहद निंदनीय है। प्रशासन इस दमनकारी कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाए। युवाओं को रोजगार की बात कहने का पूरा हक है और मैं इस लड़ाई में पूरी तरह से उनके साथ हूं।”

तो वही रेलवे बोर्ड का कहना है कि परीक्षा और परिणाम में कोई धांधली नही हुई है। छात्रा बेवहज प्रदर्शन कर रहे है, रेलवे बोर्ड ने वीडियो द्वारा चिंहित करके छात्रों पर कारवाई करने को भी कहा है। सरकार और रेलमंत्री इस  घटना पर मौन है, पर सवाल ये है की अगर छात्रा परिणाम में धांधली का आरोप लगा रहे है तो भर्ती बोर्ड और रेलवे परिणाम के जांच के आदेश क्यों नही देता? ताकि छत्रों के साथ न्याय हो सके।

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