संघर्ष इजरायल और फिलिस्तीन के बीच चल रहा है लेकिन गर्माहट भारत में ज्यादा दिखाई दे रही है।

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे विवाद से दुनिया के किसी तीसरे देश को कोई लेना देना नहीं है लेकिन भारत में ऐसे लोगों का एक समूह है जो एक मजहब विशेष के लोगों को अपमानित करने के उद्देश्य से लगातार इजरायल का समर्थन और फिलिस्तीन का विरोध कर रहे हैं।

लेकिन इस मुद्दे पर भारत सरकार ने ऐसा स्टैंड लिया है जिससे इजरायल भक्तों में बेचैनी का माहौल है। भारत ने इजरायल फलस्तीन संघर्ष में फिलिस्तीन का पक्ष लिया है।

इजराल फिलिस्तीन मामले पर भारत ने पिछले रविवार को अपनी चुप्पी तोड़ी और इस हिंसा की निंदा की थी। भारत ने कहा था कि वह दोनों पक्षों के बीच यथास्थिति में एकतरफा बदलाव न करने का आग्रह करता है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि तिरुमूर्ति ने कहा था कि गाजा पट्टी में होने वाले राॅकेट हमलों की भारत कड़ी निंदा करता है। इसके साथ ही भारत ने दोनों पक्षों से तत्काल तनाव खत्म करने की अपील की थी।

जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के समर्थन की बात आती है, फिलिस्तीन ने हमेशा खुलकर भारत का साथ दिया है। ऐसे में भारत का भी फिलिस्तीन के पक्ष में आना स्वाभाविक था।

देश के जाने माने शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने भारत के इस पक्ष की सराहना करते हुए ट्वीटर पर लिखा है कि पिछले कई दशकों से फिलिस्तीन भारत का भरोसेमंद दोस्त रहा है।भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस बात को महत्व दिया है और फिलिस्तीनी अवाम की मांगों का समर्थन किया है।

इमरान ने आगे कहा कि “दुनिया भर के देशों का समर्थन मिलने के बाद फिलिस्तीनी अवाम जश्न मना रही है और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपनी नीतियों की वजह से अपने ही देश में आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है”

मालूम हो कि इजरायल फिलिस्तीन संघर्ष के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना समर्थन करने वाले दुनिया भर के देशों का धन्यवाद किया था लेकिन उसमें भारत का नाम नहीं था।

भारत के कट्टर हिंदुत्ववादी ताकतें सोशल मीडिया पर खुलकर इजरायल का समर्थन कर रहे थे, ऐसे में लग रहा था कि भारत की नरेंद्र मोदी सरकार भी इजरायल का समर्थन कर सकती है लेकिन मोदी सरकार ने पिछली कांग्रेसी सरकारों की नीतियों पर चलते हुए फिलिस्तीन को भारत समर्थक देश मानते हुए उसके पक्ष में संयुक्त राष्ट्र में बयान दिया।

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