बीजेपी के साथ रहकर भी अपनी सेक्यूलर छवि बनाए रखने की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कोशिश अब नाकाम होती नज़र आ रही है।

सीएम नीतीश से अब मुस्लिम समुदाय ने कितनी दूरी बना ली है इसका अंदाज़ा पटना में आयोजित जेडीयू के एक कार्यक्रम में खाली कुर्सियों को देखकर साफ़ तौर पर लगाया जा सकता है।

दरअसल, गुरुवार को पटना में जेडीयू ने अल्पसंख्यक कार्यकर्त्ता सम्मलेन का आयोजन किया था। इस सम्मेलन में अल्पसंख्यक कार्यकर्त्ताओं को रिझाने के लिए लजीज पकवान बनाए गए थे।

मेनू में मटन बिरयानी और चिकेन बिरयानी की व्यवस्था की गई थी। इस कार्यक्रम में 4000 लोगों के आने का अनुमान था, जिसके लिए 6 क्विंटल मटन की व्यवस्था की गई थी।

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लेकिन इतनी माकूल व्यवस्था के बावजूद जेडीयू अपने कार्यक्रम में भीड़ जुटाने में नाकाम रही। व्यवस्था 4000 हज़ार लोगों के लिए की गई थी लेकिन शानदार पकवान के बावजूद सम्मेलन में 500 कार्यकर्ता भी नहीं जुटे। जिसके नतीजे में अल्पसंख्यक कार्यकर्ता सम्मेलन में आधी से ज़्यादा कुर्सियां खाली रह गईं।

सम्मेलन का यह हाल देखकर खाने की व्यवस्था करने वाले अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद फिरोज़ अहमद गुस्से से तमतमा उठे। सभा के दौरान ही मंत्री जी कार्यक्रम के आयोजक पर भड़क गए।

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अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद ने कहा कि ये बेहद शर्म की बात है कि इतने बड़े कार्यक्रम में हॉल तक नहीं भर पाया। मंत्री ने कहा कि मंच पर बैठे लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन इससे ज्यादा जरूरी था इस सम्मेलन तक लोगों को लाना।

हैरानी की बात तो यह है कि कुर्सियां खाली रहने के बाद भी अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री को इस बात पर भरोसा है कि बिहार के मुसलमान नीतीश कुमार के ही साथ हैं।

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