देश में बढ़ रहे साम्प्रदायिक उन्माद पर चिंता व्यक्त करते हुए 108 पूर्व नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ख़त लिखा है। उन्होंने पीएम से चुप्पी तोड़ने और ‘नफरत की राजनीती’ के खिलाफ बोलने की अपील की है।

दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग, पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रधान सचिव टीकेए नायर, पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लै समेत अन्य पूर्व नौकरशाहों ने यह खत लिखा है। इन सभी लोगों ने पीएम मोदी से अपील की है कि वो ‘नफरत की राजनीति’ को खत्म करने का आह्वान करें। ख़त के ज़रिए पीएम को ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ का नारे को भी याद दिलाया गया है।

दरअसल, बीते कई दिनों से देश में कुछ असामाजिक तत्व सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश में लगे हैं। रामनवमी पर हिंसा के मामले हों या फिर जहांगीरपुरी में हुई हिंसा, इन सभी के चलते कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाई जा रही है। यहाँ तक कि भाजपा के नेता भी इस सबमें खूब हिस्सा ले रहे हैं। भाजपा के दिल्ली अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने जहांगीरपुरी में मुसलमानों के कथित अवैध घरों पर बुलडोज़र चलाने की कैंपेन चलाई। उन्होंने राजधानी के उन 40 गांवों का नाम बदलने के लिए कहा है जिनका नाम ‘मुस्लिम’ है।

इसी माहौल का विरोध करते हुए पूर्व नौकरशाहों ने पीएम मोदी को हस्तक्षेप करने के लिए कहा है। ख़त में लिखा गया है कि “पूर्व नौकरशाहों के रूप में हम आम तौर पर इतने तीखे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन जिस तेज गति से हमारे पूर्वजों द्वारा तैयार संवैधानिक इमारत को नष्ट किया जा रहा है, वह हमें बोलने और अपना गुस्सा तथा पीड़ा व्यक्त करने के लिए मजबूर करता है।”

हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी केंद्र की नीतियों पर तल्ख टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि भारत की ‘अल्पसंख्यक विरोधी छवि’ के चलते देश की कंपनियों को अंतराष्ट्रीय बाज़ारों में नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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