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‘हम सभी लोग बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। इस वजह से हम जरूर चाहेंगे कि बीजेपी विजयी हो और नरेंद्र मोदीजी केंद्र में एक बार फिर प्रधानमंत्री बनें। उनका प्रधानमंत्री बनना देश और समाज के लिए जरूरी है।’

ये बयान है उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के मौजूदा राज्यपाल कल्याण सिंह का जिन्होंने बीते 23 मार्च को अलीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ये बात कही।

राज्यपाल जो राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति ही करता है केंद्र सरकार की पैरवी करना या फिर उसके पक्ष वोट की अपील करने काम कभी भी राज्यपाल नहीं कर सकता है।

ऐसा पहली बार है जब राज्यपाल ने खुद एक पार्टी विशेष को वोट करने के लिए कह रहा है? या फिर उस पार्टी को जिताने की बात कही होगी ये बयान इसलिए भी विवादित हो जाता है क्योंकि संवैधानिक पद पर बैठे शख्स से किसी राजनैतिक पार्टी के प्रति झुकाव की अपेक्षा नहीं की जाती है।

इस बयान पर पत्रकार कादम्बिनी शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा- जब राज्यपाल ही किसी भी पार्टी का चुनाव प्रचार करने लगें तो उनके संविधानिक पद का कोई मतलब नहीं रह जाता।

बता दें कि 87 साल के कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के वक्त वह राज्य के सीएम थे। इस घटना के बाद कल्याण की सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था।