भारत और चीन के बीच भले ही तनातनी चल रही हो। लेकिन भारत की मोदी सरकार ने औपचारिक रूप से पुष्टि की है कि भारत ने सीमावर्ती गतिरोध के बीच चीन-नियंत्रित बैंक से 1,350 मिलियन डॉलर (9,202 करोड़ रुपये) के कुल दो कर्ज लिए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, इस बैंक का मुख्यालय चीन के बीजिंग में ही है। इसकी स्थापना साल 2015 में की गई थी। इस बैंक की स्थापना के पीछे मुख्यरूप से चीन ही है।

इस मामले में आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया टीम से जुड़े कपिल ने मोदी सरकार की दोगली नीतियों का पर्दाफाश किया है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि “जब आपका TIKTOK और PUBG बैन किया जा रहा था तो मोदी सरकार, चाइनीज बैंक के आगे कटोरा ले के खड़ी थी लोन के लिए। ध्यान रहे देशभक्ति सिर्फ आपको दिखानी है।”

आपको बता दें कि चीन की बैकिंग वाले एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट बैंक ने यह घोषणा की है कि वह सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए 10 अरब डॉलर तक की फंडिंग करेगा।

इसके चलते भारत को बैंक ने अब तक कुल 3.6 अरब डॉलर का लोन दे रखा है।

चीन और भारत के बीच लद्दाख में चल रहे विवाद के बावजूद मोदी सरकार ने कोई खास विरोध नहीं किया है। सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ के कई मामलों को नजरअंदाज किया है।

लेकिन देश के लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए चीन की चंद ऐप्स को बैन कर दिया गया है। ताकि अपने वोटरों के बीच उनका राष्ट्रवादी छवि बरकरार रहे। जबकि पीछे के रास्ते से भाजपा चीन के आगे झोली फैला कर पैसों की खैरात मांग रही है।

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