संसद के मानसून सत्र में कृषि बिल को लेकर खूब हंगामा हुआ, हालांकि उसी के साथ एक ऐसा मुद्दा भी है जो दबा रह गया। कोरोना महामारी के चलते ऑटोमोबाइल सेक्टर में ख़त्म हुई नौकरियां का मुद्दा नज़रंदाज़ हो गया।

दरअसल, भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय से सवाल किया गया कि क्या कोरोना के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर की लाखों नौकरियों चली गई? मंत्रालय से राज्यानुसार आंकड़े भी मांगे गए और पूछा गया कि सरकार बेरोज़गार हुए लोगों को दोबारा नौकरियां कैसे देगी?

हैरानी की बात ये है कि मंत्रालय के पास इन सभी गंभीर सवालों का कोई जवाब नहीं है। जवाब में भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय ने कहा कि उसके पास ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुए ‘जॉब लॉस’ से जुड़ा कोई आंकड़ा नहीं है।

ये पहली बार नहीं है जब सरकार ने कहा कि उनके पास डाटा नहीं है। इससे पहले डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा था कि सरकार के पास कोरोना के कारण ज़िंदगी गवाने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों का डाटा नहीं है। सरकार के पास मृतक प्रवासी मज़दूरों का भी डाटा नहीं है। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का तो कहना है कि ये तो “नो डाटा सरकार है”।

आपको बता दें कि देश में कोरोना महामारी के कारण पहले ही अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी 23.9 प्रतिशत से गिरी है।

CMIE रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर-इंजीनियर जैसी 66 लाख प्रोफेशनल नौकरियां ख़त्म हो गई हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई बेरोज़गारी का आंकड़ा भले ही सरकार के पास न हो, लेकिन अर्थव्यवस्था की खराब हालत और बेरोज़गारी जगजाहिर है।

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