Samar Raj

यूपी में शिवपाल यादव ने आजम खान से मुलाकात की तो मीडिया वाले मजे लेने लगे, अखिलेश यादव के खिलाफ इन दोनों नेताओं की लामबंदी में तमाम संभावनाएं तलाशने लगे। मगर शाम होते-होते मीडिया वालों के लिए बिहार से एक बुरी खबर आ गई। राबड़ी देवी के आवास पर इफ्तार पार्टी में लालू परिवार के साथ नीतीश कुमार की तस्वीर आ गई।

अब यही मीडिया वाले बीजेपी के खिलाफ नीतीश और तेजस्वी की लामबंदी से इनकार करने लगे, शिष्टाचार वाली मुलाकात से राजनीति में अच्छा संदेश जाता है, ऐसा प्रवचन देने लगे। इधर सपा से बागी हो रहे दो नेताओं की मुलाकात के सौ राजनीतिक मायने तलाशने वाले मीडिया के लोग, उधर भाजपा के लिए चुनौती बन चुके दो नेताओं के मिलन को महज एक संयोग बता रहे हैं। मानों अपने मन के डर को छुपा रहे हैं, NDA में चल रहे मनमुटाव पर पर्दा गिरा रहे हैं।

वैसे तो शिवपाल यादव और आज़म खान की मुलाकात और उधर तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार की मुलाकात दो अलग-अलग राज्यों की और दो अलग-अलग परिस्थितियों की कहानी बयां करते हैं। मगर इधर एक दल में रह चुके दो बड़े नेताओं की आपसी मुलाकात और उधर दो बड़े दलों के सबसे बड़े नेताओं की आपसी मुलाकात पर मीडिया के बदले हुए बोल, उनके पक्षपात की कहानी को बयां करते हैं।

एक ही मीडिया समूह के दो अलग चैनलों के बोल सुनिए और समझिए ये कितना सेलेक्टिव कवरेज करते हैं। ज़ी मीडिया समूह के उत्तरप्रदेश उत्तराखंड और बिहार झारखंड चैनल के उदाहरण से आइए इसका मूल्यांकन करते हैं।

ऊपर वाली वीडियो में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की एक एंकर के बोल सुनिए, साथ ही लिखे गए टाइटल पर भी नज़र दौड़ाइए। ‘होगा मिलन, बढ़ेगी जलन ‘ जैसी पंचलाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है। राजनीति में मसाला तो ढूंढा ही जाता है, बस ये चैनल वही काम कर रहा है।

मगर इससे भी कई गुना बड़ी खबर है बिहार में दो बड़ी पार्टी के सबसे बड़े नेताओं का आपस में मिलना। राजद सुप्रीमो लालू यादव की गैरमौजूदगी में राबड़ी यादव और तेजस्वी यादव की अगुवाई में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। विपक्षी दलों के सभी नेताओं को भले ही इफ्तार में बुलाया गया था मगर खुद नीतीश कुमार पहुंचा आएंगे, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

NDA में दुर्गति के बीच, भाजपा से बढ़ती असहमति के बीच, नीतीश का राबड़ी आवास पर आना कोई मामूली बात नहीं है। दोनों में अगर कोई बात बन गई तो दशकों तक बिहार की सत्ता और लोकसभा में अधिकतम सीट पर कब्जा, कोई मुश्किल काम नहीं है।

मगर ऐसे बड़े संकेत और संभावनाओं के बीच उसी मीडिया समूह के ज़ी बिहार झारखंड चैनल के ये बोल सुनिए एंकर कितना डिफेंसिव होकर इसे सामान्य शिष्टाचार बता रही हैं, आपसी मुलाकात से राजनीति में अच्छा संदेश जाता है, ऐसा प्रवचन सुना रही हैं।

यूपी में कुछ ही विधायकों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं की मुलाकात पर भूचाल ले आने वाली मीडिया बिहार में सवा सौ विधायकों के प्रतिनिधियों की आपसी मुलाकात को सामान्य बता रही है। हंसी आती है ये देखकर कि मीडिया किस दुविधा में, किस संकट में फंस जा रही है।

सुबह से कूद कूदकर विश्लेषण देने वाली एंकर, शाम तक कितनी मासूम बन जा रही हैं। यूपी में आगे क्या होगा ये शिवपाल और आजम खान तय करेंगे, जयंत और राजभर जैसे तमाम सहयोगी करेंगे, आखिर निर्णय निःसंदेह अखिलेश यादव करेंगे। बिहार में क्या होगा ये भी RJD के नेता और उनके गठबंधन सहयोगी तय करेंगे, आखिर में नीतीश और तेजस्वी निर्णय लेंगे कि साथ लड़ेंगे या एक दूसरे के विरोधी रहेंगे।

मगर इन राजनीतिक निर्णयों के बीच मीडिया वालों के बोल का अध्ययन करना बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। कि कैसे एक राजनैतिक धड़े की टूट में इन्हें मज़ा आ रहा है और दूसरे राज्य में इसी संभावना मात्र से इनका दिल टूटा जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

20 − 15 =