एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सबसे ज्यादा बेघर लोगों की संख्या यूपी के कानपुर शहर में है। और विडम्बना ये कि इस बेघर लोगों के राज्य में भाजपा कई दशकों से ‘भगवान’ का घर बनाने के नाम पर वोट मांग रही है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही माह बचे हैं। ऐसे में भाजपा को भगवान के घर की याद तो आनी ही थी, सो आ गयी। बुधवार को यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट किया- अयोध्या काशी भव्य मंदिर निर्माण जारी है मथुरा की तैयारी है।

केशव के इस ट्वीट पर अब विवाद शुरू हो गया है। बसपा प्रमुख मायावती ने लिखा है, ‘‘यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा विधानसभा आमचुनाव के नजदीक दिया गया बयान कि अयोध्या व काशी में मन्दिर निर्माण जारी है अब मथुरा की तैयारी है, यह भाजपा के हार की आम धारणा को पुख्ता करता है। इनके इस आखिरी हथकण्डे से अर्थात् हिन्दू-मुस्लिम राजनीति से भी जनता सावधान रहे।’’

मायावती का आरोप तर्कसंगत मालूम पड़ता है। केशव प्रसाद मौर्य ने जो नारा दिया है वो घोर साम्प्रदायिक और विभाजनकारी है। कभी इस तरह के नारा बाबरी विध्वंस से जुड़े हिन्दूवादी लंपट लड़के दिया करते थे। वैसे बता दें कि केशव प्रसाद मौर्य का सियासी सफर भी VHP (विश्व हिन्दू परिषद) से शुरू हुआ था।

केशव प्रसाद मौर्य के ट्वीट के बाद इस साम्प्रदायिक नारे का एक रीकैप मौजू हो जाता है। दरअसल भाजपा, वीएचपी और कई अन्य हिन्दूवादी संगठनों ने अयोध्या-मथुरा-काशी को लेकर देश भर में कथित आंदोलन चलाया था। कई राजनीतिक और सामाजिक कारणों से अयोध्या वाले मामले को प्रमुख रखा गया। 6 दिंसबर 1992 को जब बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने विध्वंस कर दिया, तब विश्व हिन्दू परिषद ने नारा दिया था– ‘बाबरी मस्जिद झांकी है, काशी- मथुरा बाक़ी है’

बाबरी विध्वंस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मामले में आरोपी रहे आचार्य धर्मेंद्र ने भी कहा था,  ‘अयोध्या तो बस झांकी है। काशी-मथुरा बाकी है। जहां-जहां दाग हैं, सब साफ किया जाएगा।’

अब जरा सोचिए कर देखिए आचार्य धर्मेंद्र जैसे सांप्रदायिक हिंसा के आरोपी और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के बयान में क्या फर्क है? देश के सबसे बड़े राज्य के उपमुख्यमंत्री खुलेआम विवादित स्थलों पर मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं। क्या इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा नहीं है?

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जिस राज्य में कुछ माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, क्या वहां के उपमुख्यमंत्री के पास जनता को दिखाने के लिए कोई विकास कार्य नहीं है?  अगर है, तो लोगों को सांप्रदायिक हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश क्यों हो रही है?

हालांकि केशव प्रसाद मोर्य के बयान से साफ जाहिर होता है कि बीजेपी एक बार फिर अयोध्या-मथुरा-काशी के एजेंडे के सहारे चुनावी नैया पार लगाना चाहती है।

 

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