• 587
    Shares

वर्ष 2014 से वर्ष 2019 तक शासन करने के बाद नरेंद्र मोदी की सरकार का प्रदर्शन पिछली यूपीए सरकार की तुलना में निराशाजनक रहा है। ये बात कोई राजनीतिक आलोचक नहीं बल्कि सरकार के अपने आंकड़ें कह रहे हैं।

वर्ष 2014 से ही मोदी सरकार की एक योजना जमकर सुर्ख़ियों में बनी रही, “मेक इन इंडिया”। इस योजना का ज़बरदस्त प्रचार किया गया और इसके आधार पर नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि वो भारत को एक बड़ा उत्पादक देश बनाएंगें।

वर्ष 2014 से वर्ष 2019 आ गया है लेकिन मोदी सरकार अपने कई वादों की तरह इसे भी पूरा करने में सफलतापूर्वक नाकाम रही है। इस सरकार के कार्यकाल में गौरक्षा के नाम पर हत्याएं और हमले तो बढ़े लेकिन देश में उत्पादन हाल लाल कृष्ण आडवाणी के राजनीतिक करियर की हो गया है।

मेक इन इंडिया का शेर देश के उत्पादन को हज़म कर गया है। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान ‘इन्डेक्स ऑफ़ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन’ यानी आईआईपी की विकास दर 3.9% रही। वहीं यूपीए सरकार के कार्यकाल में आईआईपी की विकास दर 11.9% थी। बता दें, कि आईआईपी वो इन्डेक्स है जिसमें देश में उत्पादन को दर्शाया जाता है। इसे प्रतिमाह जारी किया जाता है।

गौरतलब है कि उत्पादन की ये हालत करने में मोदी जी के कथित “मास्टर-स्ट्रोक मूव” नोटबंदी ने बड़ा योगदान दिया है। नोटबंदी से नकदी पर चलने वाले देश के असंगठित क्षेत्र यानी छोटे कारखाने और फैक्ट्रियों की कमर इस तरह टूटी कि वो अभी तक उस नुकसान से उभर नहीं पाएं है।

भारत में 90% कामगार ऐसी ऑफिस में नहीं बल्कि असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और इसलिए देश का ज़्यादातर उत्पादन इन्हीं छोटे कारखानों और फैक्ट्रियों में होता है। नोटबंदी ने इन्हें बर्बाद कर देश के उत्पादन को बर्बाद कर दिया और बाकी बची कुची कसर जीएसटी ने पूरी कर दी।

शायद यही कारण है कि इस बार पीएम मोदी के भाषणों से लेकर उनके रोड शो तक में कहीं भी ‘मेक इन इंडिया’ का शेर दिखाई नहीं दे रहा है। और 2014 के विपरीत अब उनके भाषणों में विकास के बजाए पाकिस्तान, बोर्डर, शमशान-कब्रिस्तान और जवान (सैनिक) है।