कभी अपने ज़ोरदार भाषणों से विरोधियों को ख़ामोश कर देने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी अब ख़ुद ख़ामोश होते जा रहे हैं। पिछले पांच सालों में उन्हें सदन में काफी कम बोलते हुए सुना गया है। उन्होंने इन पांच सालों में सदन में महज़ 365 शब्द ही बोले हैं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 15वीं लोकसभा (2009-14) की तुलना में मौजूदा यानी 16वीं लोकसभा (2014-19) में आडवाणी के बोले जाने वाले शब्दों में 99 फीसदी की गिरावट आई है। संसद में पिछले पांच साल में आडवाणी 296 दिन प्रेजेंट रहे लेकिन सिर्फ 365 शब्द बोल पाए।

वहीं पिछली यानी 15वीं लोकसभा के दौरान आडवाणी ने 42 बार बहसों और अन्य कार्यवाहियों में हिस्सा लिया और करीब 35,926 शब्द बोले थे। ऐसा नहीं है कि इस बार सदन में आडवाणी की उपस्थ‍िति कम रही है। 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थ‍िति तकरीबन 92 फीसदी है। इसका मतलब कि वह सदन में मौजूद तो रहते हैं, लेकिन अब बोलने पर ख़ामोशी को तरजीह देते हैं।

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अब सवाल यह उठता है कि तमाम शोर-शराबे के बावजूद अपनी बात सदन के समक्ष रखने में माहिर माने जाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी अचानक ख़ामोश क्यों हो गए हैं। हो सकता है कि बढ़ती उम्र की वजह से उन्होंने बोलना कर दिया हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके तल्ख़ रिश्ते को देखते हुए बढ़ती उम्र को उनकी ख़ामोशी का फैक्टर मानना तर्कसंगत नहीं होगा।

कभा बीजेपी के फायरब्रांड नेता कहे जाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी की नरेंद्र मोदी और अमित शाह वाली बीजेपी में क्या हालत हो गई है, यह किसी से छिपा नहीं है। सभी जानते हैं कि पीएम मोदी के शासनकाल में बीजेपी के ‘लौह पुरुष’ कहे जाने वाले आडवाणी की दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है।

आडवाणी की इसी हालत पर वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने टिप्पणी की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “क्या से क्या हो गया बेवफा तेरे राज में… संसद हमेशा जाते हैं। पहली लाइन में ही बैठते हैं। सबको-देखते सुनते भी रहते हैं सिर्फ बोलते नहीं। 5 साल में बोले सिर्फ 365 शब्द.. न बोल पाने का दर्द आडवाणी से ज्यादा कौन समझ पाएगा”?

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