हरियाणा बॉर्डर पर पंजाब और हरियाणा के किसानों का उग्र रूप देखने को मिल रहा है। दरअसल किसानों के इस उग्र रूप के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार माना जा रहा है। क्यूंकि हाल ही में सरकार द्वारा जो कृषि कानून लाए गए हैं। उन्हें किसान विरोधी करार दिया गया है।

जिसके चलते बीते महीनों से ही सड़कों पर उतर कर देश के अन्नदाता सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। लेकिन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी। तो किसानों ने 26 नवंबर को दिल्ली कूच करने का ऐलान किया।

कल से ही पंजाब के कई हिस्सों से किसान दिल्ली पहुंचने के लिए निकल पड़े हैं। लेकिन हरियाणा बॉर्डर पर उन्हें सरकार के आदेश के चलते पुलिस द्वारा रोका जा रहा है।

हरियाणा के कई हिस्सों में पुलिस और किसानों के बीच टकराव जोरों शोरों से चल रहा है। जो बैरिकेडिंग पुलिस द्वारा उन्हें रोकने के लिए बनाई गई थी। वह किसानों ने मिनटों में ही तोड़ दी।

जिसके चलते पुलिस ने किसानों पर वाटर कैनन चलाई और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। सोशल मीडिया पर किसानों पर किए जा रहे इस अत्याचार का जमकर विरोध हो रहा है।

खुद का वजूद बचाने के लिए आज देश के अन्नदाता को ये अत्याचार बर्दाश्त करना पड़ेगा। ये शायद ही किसी न सोचा होगा।

आपको बता दें कि किसानों पर जो आंसू गैस के गोले दागे गए हैं। उन्हें गैर जानलेवा अस्त्रों की लिस्ट में गिना जाता है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इन आंसू गैस के गोले के लिए सीएस गैस का इस्तेमाल किया जाता है।

जब यह गैस हवा में निकलती है तो हमारे शरीर के कई हिस्सों पर बुरा प्रभाव डालती है। इससे सांस संबंधी की परेशानियां हो सकती हैं।

गौरतलब है कि इन किसानों में ज्यादातर बुजुर्ग किसान शामिल है। पुलिस द्वारा इस गैस का इस्तेमाल किया जाना उनकी सेहत के लिए हानिकारक है। किसानों पर इस तरह की कार्रवाई करना सरकार क्रूर रवैया दर्शाती है।

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