बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में चमकी चमकी बुख़ार यानी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) का क़हर जारी है। इस बीमारी के चलते मुज़फ़्फ़रपुर और आसपास के कुछ जिलों के तकरीबन 150 बच्चों की मौत हो चुकी है और तकरीबन 200 बच्चे इसकी चपेट में हैं। इनका इलाज चल रहा है लेकिन स्थिति बहुत ही गंभीर है।

इस गंभीर स्थिति के मद्देनज़र दिल्ली स्थित न्यूज़ चैनलों के तमाम स्टार एंकर्स मुज़फ़्फ़रपुर में डेरा डाल चुके हैं और अस्पताल से ही धुंआधार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। वह काम कर रहे डॉक्टरों से अस्पताल की व्यवस्था के बारे में सवाल कर रहे हैं और ईलाज के कामों में बाधा डाल रहे हैं।

दिल्ली के इन एंकरों के इस रवैये की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है। लेकिन इसी के साथ सोशल मीडिया पर एक स्थानीय पत्रकार की जमकर तारीफ भी हो रही है। जिस स्थानीय पत्रकार की तारीफ हो रही है। उनका नाम है आमिर हमज़ा, जो स्थानीय चैनल डेन में रिपोर्टर हैं।

अब सवाल यह उठता है कि जब ज़्यादातर पत्रकारों को अपनी असंवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे समय में आमिर की तारीफ क्यों हो रही है। तो इसका जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उनकी ये तस्वीर देगी।

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तस्वीर में आमिर एक मोटरसाइकिल पर एक महिला और बच्चे को बैठाए हुए नज़र आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि रिपोर्टिंग के दौरान आमिर ने एक असहाय महिला की मदद की और उसके साथ उसके बच्चे को अस्पताल पहुंचाया। उसके बच्चे को चमकी बुखार था।

पत्रकार आमिर से जब द लल्लनटॉप ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मैं रिपोर्टिंग के लिए बुधवार यानी 19 जून को मिशन पूरा कर इलाके जा रहा था। साढ़े तीन बज रहे थे। जब मैं धीरन छपरा गांव पहुंचा। वहां की एक महिला पानी टंकी चौक पर फूट-फूटकर रो रही थी। आस-पास कई लोग खड़े थे। मैं भी उसके पास गया और रोने का कारण पूछा।

उस महिला ने बताया कि उसे अस्पताल जाना है। उसके बच्चे को चमकी बुखार हुआ है। श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल यानी SKMCH में बच्चे का इलाज चल रहा था। पर डिस्चार्ज कर दिया गया। ये कहकर कि उसका बच्चा ठीक हो गया है। पर जैसे ही वो घर पहुंची, बच्चे की तबीयत खराब होने लगी। इसलिए वो अस्पताल जाने के लिए कोई साधन ढूंढ रही थी। पर कोई साधन नहीं मिल रहा था।

मुज़फ्फरपुर में दो ही अस्पताल हैं। जहां पर इस बुखार का इलाज होता है। एक तो श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज और दूसरा केजरीवाल अस्पताल। उस जगह से केजरीवाल अस्पताल पास था। तो मैंने अपनी बाइक पर महिला और उसके बच्चे को बिठाया। अस्पताल में बच्चे को भर्ती करवाया। वहां के डॉक्टर ने बच्चे को अटेंड किया। इलाज शुरू किया। अब बच्चा ठीक है। हालांकि अभी भी वो अस्पताल में भर्ती है।

आमिर के इस बेहतरीन आचरण की सोशल मीडिया पर जमकर प्रशंसा हो रही है। लोग उनकी प्रशंसा के साथ ही दिल्ली के राष्ट्रीय चैनलों के पत्रकारों पर तंज़ कस रहे हैं।

आवेश तिवारी नाम के फेसबुक यूज़र ने लिखा, “सोचिए, अगर उनकी जगह दिल्ली के नेशनल चैनल के पत्रकार होता तो क्या करता? तड़प रहे बच्चे की मां के मुंह तक फोंफी लगा कर कहता, कि देखिए हमारा समाज व सरकारी व्यवस्था कितना बेरहम है कि एंबुलेंस भी नहीं भेज रहा है”।

उन्होंने आगे लिखा, “मौत के मुंह में जा रहे बच्चे की पल-पल रिकार्डिंग करता। मां के आंसुओं को अपने चैनल की टीआरपी में बदलता। अगले दिन इसपर डिबेट कराता। प्रतिस्पर्धा में आगे रहने को लेकर बहुत खुश होता/होती। लेकिन टीआरपी प्रतिस्पर्धा की परवाह नहीं कर आमिर भाई ने हम सभी का सिर ऊंचा कर दिया। असली हीरो आमिर भाई को सलाम”।