पंजाब नेशनल बैंक को हजारों करोड़ का चूना लगाने वाले नीरव मोदी को पकड़ा जा सकता था। आयकर विभाग को नीरव मोदी के कारनामे की जानकारी पहले से थी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक घोटाला उजागर होने से 8 महीने पहले ही आयकर विभाग की जांच में नीरव मोदी संदिग्ध पाया गया था।

लेकिन इस रिपोर्ट को दूसरे अन्य एजेंसी के साथ साझा नहीं किया। इसका परिणाम ये हुआ कि नीरव मोदी घोटाला कर बहुत आसानी भारत से भाग निकला।

दरअसल हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर आयकर विभाग ने 10 हज़ार पन्नो की रिपोर्ट 8 जून 2017 को ही तैयार कर ली थी। लेकिन आयकर विभाग ने इस रिपोर्ट को CBI, ED, DRI, SFIO जैसी किसी भी जांच एजेंसी से साझा नहीं किया।

आयकर विभाग की चुप्पी की वजह से पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का खुलासा आठ महीने बाद यानी फरवरी 2018 में हो सका।

हालांकि आयकर विभाग के एक अधिकारी ने रिपोर्ट साझा न करने की अपनी वजह बतायी है। उन्होंने कहा है कि आयकर विभाग में हर रिपोर्ट साझा करने का कोई प्रोटोकॉल नहीं है।

अधिकारी ने कहा कि नीरव मोदी और मोहुल चौकसी का घोटला सामने आने के बाद इस साल जुलाई-अगस्त से डिपार्टमेंट को सारी जानकारी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) से साझा करने को कहा गया था।

आयकर विभाग के अधिकारी भले ही प्रोटोकॉल का हवाला दे रहे हो लेकिन सवाल तो उठता है कि जब घोटाले की जानकारी थी तो उसे अन्य जांच एजेंसी के साथ साझा क्यों नहीं किया गया? क्या आयकर विभाग पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव था?

इस मामले पर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से जवाब माँगा है। स्वामी ने ट्वीट किया है कि अरुण जेटली को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताना चाहिए की आखिर क्यों आयकर विभाग की रिपोर्ट के बाद जांच एजेंसीयों ने फ़ौरन लुक आउट नोटिस या स्टॉप नोटिस जारी नहीं किया?

बता दें कि पीएनबी घोटाले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने 13,500 करोड़ रुपए का घोटाला किया है। जिसके बाद से ये बैंक लगातार घाटे में चल रहा है। इस साल जून की तिमाही में 940 करोड़ रुपये का और जनवरी-मार्च में 13,417 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

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