CAA-NRC को लेकर मोदी सरकार ने पूरे देश को गुमराह किया है। जिसकी वजह से पाकिस्तान से आये अल्पसंख्यक हिंदुओ को शर्मसार होना पड़ा है। अब ये पाकिस्तानी हिन्दू न घर के रहे ना घाट के!

दरअसल, भारत में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं और सिखों का एक जत्था गुरुवार को वापस अपने देश पाकिस्तान लौट जाएगा। CAA कानून को लागू हुए एक साल होने वाले हैं मगर अभी तक इन शरणार्थियों को भरतीय नागरिकता नहीं मिल पाई।

आर्थिक तंगी के चलते उन्हें भारतीय नागरिकता के सपने को छोड़ देना पड़ा है। दूसरी तरफ एक सच्चाई ये भी है कि, भाजपा और मोदी सरकार ने इन कानूनों का अपने लिए राजनीतिक फायदा उठा लिया है।

संसद से कानून पारित होने के बाद भी भारत सरकार ने इसे लागू नहीं किया है।

इन सभी पाकिस्तानी हिंदुओं और सिखों की संख्या कुल मिलाकर 243 है। सभी पाकिस्तानी नागरिकों को अब वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान जाने की अनुमति मिल गई है।

ये शरणार्थी मोदी सरकार के द्वारा 12 दिसंबर 2019 को पारित CAA और NRC कानून के बाद भारत की नागरिकता हासिल करने आये थे, लेकिन अब मायूस अपने वतन लौट रहे हैं।

पाकिस्तान के 37 वर्षीय, श्रीधर सिंध प्रांत के उमरकोट जिले के रहने वाले हैं। श्रीधर भारत में रह रहे थे और लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रहे थे। उन्हें नागरिकता संशोधन कानून से बहुत उम्मीदें थीं, मगर उनके हाथ सिर्फ एक लंबा इंतजार लगा।

श्रीधर ने बताया कि पिछले चार साल से मैं अपनी पत्नी और बसी के वीजा के लिए एफआरआरओ जोधपुर और नई दिल्ली में गृह मंत्रालय ले चक्कर लगा रहा हूँ। मैंने अब हर मान ली है और वापस अपने वतन जाना चाहता हूँ।

पाकिस्तान से जो नागरिक भारत आये हैं उनकी स्थिति बहुत दयनीय है। आर्थिक तंगी की वजह से ये लोग दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। जबकि ये लोग भारत बेहतर आजीविका की तलाश में आये थे।

गौरतलब हो कि, CAA कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आये हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई प्रवासियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी।

जिन्होंने अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना किया है, लेकिन अब ये लोग खुद भारत के सिस्टम से उत्पीड़ित होकर वापस अपने देश लौट रहे हैं।

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