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गुजरात हाईकोर्ट ने विजय रूपाणी सरकार को फटकार लगते हुए कहा है कि वो कोरोना से निपटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही। कोर्ट ने सूबे के अस्पतालों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इनकी हालत किसी कालकोठरी से भी बदतर है।

दरअसल, हाईकोर्ट में कोरोना मामलों के बीच अस्पतालों की बदहाली को लेकर एक जनहित याचिका दर्ज की गई थी। इसी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य की विजय रूपाणी सरकार को जमकर फटकार लगाई। जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस इलेश वोरा की बेंच ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में कोरोना के मामलों को ‘कृत्रिम रूप से नियंत्रित’ करने की कोशिश की जा रही है।

साथ ही बेंच ने अपनी टिप्पणी में अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को एक कालकोठरी से भी बदतर बताया। बेंच ने कहा कि यह काफी निराशा और पीड़ा वाली बात है कि सिविल अस्पताल में ऐसे हालात हैं। हमें ये बहुत निराशा के साथ राज्य को कहना पड़ रहा है कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल बहुत बुरी हालत में है। मरीजों के इलाज वाले अस्पतालों की हालत किसी कालकोठरी या तहखाने से भी बदतर लग रही है।

दोनों जज यहीं नहीं रुके। गुजरात सरकार पर तंज कसते हुए बेंच ने स्वास्थ्य सेवाओं की हालत डूबते हुए टाइटैनिक से कर दी। बेंच ने याचिका पर सुनवाई के दौरान रूपाणी सरकार को जल्द से जल्द कोरोना मरीजों के इलाज और फैसिलिटी के इंतजामों में सुधार के निर्देश दिए।

बता दें कि गुजरात में अब तक कोरोना से 829 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 377 मौतें अकेले सिविल हॉस्पिटल में ही हुई हैं। यानी एक अकेले अस्पताल में ही राज्य की 45 फीसदी मौतें हुई हैं। गुजरात कोरोना संक्रमण के मामले में देश में तीसरे नंबर पर है।

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