मोदी सरकार को राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट से तथाकथित क्लीन चिट ज़रूर मिल गई हो लेकिन ये विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्योंकि लगातार इस मामले में सरकार के खिलाफ चीज़ें सामने आ रही हैं।

इस मामले में मोदी सरकार पर आरोप है कि उसने पहले से दोगुने दामों में फ़्रांसीसी कंपनी डसौल्ट से राफेल विमानों का सौदा किया है और सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को सौदा से हटाकर अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को इसका हिस्सा बनाया है।

मोदी सरकार का कहना है कि विमान अपग्रेड होने के कारण उसकी कीमत बढ़ी है लेकिन अब डसौल्ट ने ही एक नई डील फ़्रांस सरकार से की है जिसमें वो 2.3 बिलियन डॉलर यानी 14,530 करोड़ रुपए में फ़्रांस वायुसेना को 28 अपग्रेड राफेल विमान देगा। ये विमान पूरी तरह से नई टेक्नोलॉजी से लैस होंगें। यानी एक राफेल विमान की कीमत 517 करोड़ हुई।

वहीं, मोदी सरकार ने डसौल्ट से 36 राफेल विमानों का सौदा 7.8 बिलियन यूरो यानी मतलब 55,500 करोड़ रुपए में किया है। मतलब एक विमान की कीमत 1541 करोड़ रुपए। इस सौदे के बाद भारत में फिर से मोदी सरकार द्वारा किये गए राफेल सौदे पर सवाल उठने लाज़मी हैं।

क्या है विवाद राफेल एक लड़ाकू विमान है जिसे भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है और इस डील से उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है। जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी।

कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 526 करोड़ थी। इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी ‘डसौल्ट’ के साथ मिलकर बनाती।

अप्रैल 2015, में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी फ़्रांस यात्रा के दौरान इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए में नई डील की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1541 करोड़ रुपये होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें।

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