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किंगफिशर के बाद अब जेट एयरवेज के 20 हज़ार कर्मचारियों का भविष्य खतरें में है। जिसे लेकर एयरलाइन्स के जेट एयरवेज के पायलटों ने पीएम को चिट्टी लिखकर कहा, हम प्रधानमंत्री से भी अपील करते हैं कि वे कंपनी में काम कर रहे 20 हजार लोगों की नौकरियां बचायें। हम कंपनी का परिचालन जारी रखने के लिये भारतीय स्टेट बैंक से 1,500 करोड़ रुपये जारी करने की अपील करते हैं।

दरअसल जेट एयरवेज को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जिसकी वजह से पायलट के साथ-साथ इंजीनियर और वरिष्ठ प्रबंधकों को जनवरी से मार्च तक वेतन नहीं मिला है। कर्ज में डूबी जेट एयरवेज ने कहा कि वो 1,500 करोड़ रुपये के निवेश की अपील और नए प्लान को लेकर कर्जदाताओं से मुलाकात करेगी।

एयरलाइंस को उम्मीद है कि सोमवार को होने वाली बैठक में तत्काल फंड जारी करने के लिए कर्जदाता राजी हो जाएंगे। हालांकि, अभी तक बैंकों ने 1,500 करोड़ रुपये के रिलीफ फंड में से महज 200 करोड़ रुपये जारी किए हैं। दूसरी तरफ, सोमवार की बैठक को देखते हुए ही जेट एयरवेज के पायलट्स यूनियन ने ‘वेतन नहीं तो काम नहीं’ का अपना फैसला टाल दिया है।

प्रधानमंत्री से की अपील

जेट एयरवेज के पायलटों के संगठन ने भारतीय स्टेट बैंक से 1,500 करोड़ रुपये जारी करने की अपील की है। साथ ही संगठन ने कंपनी में काम कर रहे 20 हजार लोगों की नौकरियां बचाने की भी अपील प्रधानमंत्री से की।

जेट एयरवेज के पायलटों के संगठन नेशनल एविएटर्स गिल्ड के उपाध्यक्ष आदिम वालियानी ने कहा कि हम प्रधानमंत्री से भी अपील करते हैं कि वे कंपनी में काम कर रहे 20 हजार लोगों की नौकरियां बचायें।

गौरतलब हो कि जेट एयरवेज पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और कंपनी पिछले साल से ही गंभीर आर्थ‍िक संकट से गुजर रही है।

जिसके कारण कंपनी के 124 विमानों में से सिर्फ 7 विमान उड़ा रही है वह भी घरेलू उड़ानों में। कंपनी के 80 फीसदी विमान सेवा से बाहर हो गए हैं, क्योंकि ठेकेदारों ने किराए का भुगतान न होने के कारण विमान देने से इंकार कर दिए हैं। कंपनी ने रविवार को कहा कि उसने पश्चिम यानी एम्सटर्डम, लंदन और पेरिस के लिए अपनी उड़ानों को 16 अप्रैल तक के लिए रद्द कर दिए हैं।