दो साल पहले गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए आक्सीजन कांड में कई बच्चों की जान बचाने वाले डॉक्टर कफील खान अब मुजफ्फरपुर में चमकी बुख़ार से जान गंवाते बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर सामने आए हैं।

कफील खान अपनी टीम के साथ गोरखपुर से मुजफ्फरपुर पहुंचे हैं। यहां उन्होंने चमकी बुख़ार से जूझ रहे बच्चों के लिए हेल्थ कैंप लगाया है। बता दें कि मुजफ्फरपुर में इस समय चमकी बुखार का प्रकोप है, इस बुखार से अबतक 150 के करीब बच्चों की मौत हो चुकी है। सरकार की ओर से इसपर काबू पाने की कोशिशें तो की जा रही हैं, लेकिन ख़राब स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते अभी तक इसपर काबू नहीं पाया जा सका है।

मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में डॉक्टर्स और बेड की कमी के चलते बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। डॉक्टर्स की इसी कमी के मद्देनज़र डॉक्टर कफील ने मुजफ्फरपुर पहुंचकर हेल्थ कैंप लगाया।
डॉक्टर कफील के इस हेल्थ कैंप में 300 बच्चों को चेकअप के बाद मुफ्त दवाइयां दी गईं। डाक्टरों की टीम में कफील खान के अलावा डॉ अरशद अंजुम, डॉ एन आजम, डॉ आशीष कुमार भी शामिल हैं।

कफील खान अपने इस हेल्थ कैंप के ज़रिए लगातार बच्चों को बचाने की कोशिश में जुटे हैं। उनके इन प्रयासों को देखते हुए कई लोग उनकी मदद के लिए सामने आ रहे हैं। लोग उन्हें इस कार्य के लिए पैसों की पेशकश कर रहे हैं, लेकिन वह पैसों की जगह लोगों से दवाई भेजने की अपील करते नज़र आ रहे हैं।

बोलता हिंदुस्तान को रफ़ीक अहमद नाम के एक समाजसेवी ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर कफील के काम को देखते हुए बच्चों के ईलाज के लिए पैसों की पेशकेश की थी। लेकिन उन्होंने पैसे लेने से मना कर दिया और कहा कि अगर बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो उनकी दवाओं का प्रबंध करें।

इससे पहले डॉक्टर कफील SKMCH अस्पताल भी पहुंचे थे। उन्होंने पीआईसीयू से लेकर वार्ड में भर्ती बच्चों को देखा और उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने अस्पताल के सुपरिटेंडेंट और बच्चा विभाग के एचओडी से भी मुलाकात की और महामारी का रूप ले चुकी चमकी बुखार के रोक-थाम के विषय पर विचार विमर्श किया। उन्होंने कहा है कि SKMCH में 200 बेड वाले आइसीयू की तत्काल व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए।

बता दें कि कफील खान वही डॉक्टर हैं जिन्होंने दो साल पहले गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज ऑक्सीजन कांड में एक हीरो की तरह सामने आए थे और कई बच्चों की जान बचा ली थी। लेकिन बाद में उन्होंने इस कांड के लिए सूबे की योगी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया था, जिसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

वे लगभग 7 महीने तक जेल में बंद रहे। अप्रैल 2018 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। उन्होंने अपने निलंबन को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिछले महीने मई में राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि वह सात जून तक डॉक्टर कफील के मामले में निर्णय लेकर उनके बकाया देयकों का भुगतान करें।