प्रधानमंत्री मोदी के 70वें जन्मदिन को लाखों लोगों ने बेरोज़गार दिवस के रूप में मनाया। बेरोज़गारी से हताश लोग अब सरकार से सीधा सवाल कर रहे हैं क्योंकि उनकी मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

अभी तक अपने आपको सुरक्षित महसूस करने वाली मिडिल क्लास भी अब बेरोजगारों की लाइन में लगने जा रही है।

क्योंकि CMIE के मुताबिक, भारत में मई से अगस्त महीने के बीच में 66 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। ये आंकड़ा पेशेवर यानी कि प्रोफेशनल नौकरियों का है जिनमें इंजीनियर, चिकित्सक और शिक्षक जैसे सैलरीड रोजगार आते हैं।

दरअसल, CMIE ने डाटा जारी कर बताया है कि पिछले साल के मई-अगस्त महीने में 188 लाख लोग वाइट कालर प्रोफेशनल नौकरियां कर रहे थे। इस साल केवल 122 लाख लोग कर ही ये नौकरियां कर रहे हैं।

इसका मतलब 66 लाख लोगों की नौकरियां चली गयी हैं। ये लोग सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्र में काम करते हैं। लेकिन इसमें सेल्फ-एम्प्लॉयड व्यवसायी शामिल नहीं है।

CMIE रिपोर्ट का कहना है कि पिछले 4 साल सालों में रोजगार को लेकर जो थोड़ा बहुत फायदा भी हुआ था, वो सब लॉकडाउन के चलते खराब हो गया।

इन आंकड़ों से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि देश में रोज़गार का क्या हाल है। डूबती अर्थव्यवस्था की मार केवल गरीब मज़दूर तक सीमित नहीं है। इसकी चपेट में सैलरी पाने वाला सरकारी कर्मचारी भी हैं।

CMIE रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी प्रोफेशनल सैलरीड कर्मचारी के अलावा औद्योगिक श्रमिक भी बेरोज़गारी की मार झेल रहे हैं। एक साल में 26% इंडस्ट्री वर्कर्स की नौकरियों में कटौती हुई है, 50 लाख लोगों की नौकरियां गई हैं।

ये सभी आंकड़ें देश में बेरोज़गारी का हाल बताने के लिए काफ़ी हैं।

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