उत्तर प्रदेश में के चार जिलों में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) दस्तक दे चुका है। जिससे अभी 19 जून तक मरने वालों संख्या 16 हो चुकी है। सबसे ज्यादा मामला गोरखपुर और कुशीनगर में देखा गया है जहां 12 मौतें हो चुकी है।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के अधिकारिक आकड़ों पर नज़र डाले तो गोरखपुर में मई से 19 जून के बीच जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से ग्रसित 130 मरीज मिले हैं। जबकि 20 जून से 22 जून तक भर्ती मरीजों के साथ मरने वालों की संख्या का अभी खुलासा नहीं किया गया है।

मगर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के अधिकारीयों की माने तो जो भी मरीज मिले है उनमें 80 फीसद का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। बिहार के हालत को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी कोई जोखम नहीं उठाना चाहते है।

यही वजह है की वो बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जेई, एईएस के इलाज की तैयारियों की समीक्षा करने खुद गोरखपुर पहुंचे हुए। इसी सिलसिले में आज वो गोरखपुर-बस्ती मंडल के अफसरों के बैठक भी करेंगे।

स्वास्थ्य अधिकारीयों की माने तो बारिश के बाद जेई, एईएस जैसी बीमारी तेजी फैलती है। अभी जब बारिश हुई नहीं उसमें 16 लोगों की जान चली जाना तब फिर अंदाज़ा लगाया जा सकता है की बारिश होने के बाद क्या होगा।

अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के बाद संख्या में बढ़ोतरी की आशंका है। इससे निपटने के लिए ही स्वास्थ्य महकमा अलर्ट पर है।

अधिकारियों के मुताबिक जन जागरूकता, साफ-सफाई और टीकाकरण से जेई, एईएस का प्रकोप कम हुआ है। एक जुलाई से दस्तक अभियान की शुरुआत हो रही है।

इसके तहत बच्चों को जेई का टीका लगाया जाएगा। टीकाकरण अभियान 25 जुलाई तक चलाया जायेगा, टीकाकरण से जेई के मरीजों की संख्या कम हुई है।

मगर सवाल अब भी वही है आखिर मौत हो जाने के बाद सरकारें क्यों जागती हैं। सीएम योगी खुद गोरखपुर से सांसद रहें है उन्होंने अपने कार्यकाल में इस बीमारी को खत्म करने के लिए क्या कदम उठाये ?

आखिर बारिश के बाद किसी मौत होना क्यों ज़रूरी है ? ये जवाब तो खुद सीएम योगी को देना होगा

आखिर बिहार जैसे हालत तो गोरखपुर में पहले हो चुके हैं फिर भी इस बीमारी को ख़त्म करने या असर ख़त्म करने में वो विफल क्यों रहें है ?