मोदी सरकार में कई ईमारत, कंपनी, एयरपोर्ट धीरे धीरे क़दमों से निजीकरण के तरफ बढ़ती जा रही है। इसी का ताजा उदाहरण है भारत के तीन प्रमुख हवाई अड्डे का ठेका अडानी ग्रुप का देना। जिन शहरों के हवाई अड्डे ठेके पर दिए गए है उनमें दो राज्यों की राजधानी के शहर शामिल हैं।

दरअसल मोदी सरकार ने इसी महीने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत भारत के तीन प्रमुख हवाई अड्डों- अहमदाबाद, लखनऊ और मंगलुरु को पट्टे पर देने के प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दे दी थी। मगर इसमें हैरान करने वाली बात ये है की अडाणी समूह ने 50 वर्षों की अवधि के लिए तीन हवाई अड्डों के संचालन के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाकर ठेका हासिल किया था।

इससे इसी साल के शुरूआती महीने में अडानी समूह ने एएआई के स्वामित्व वाले जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डों के संचालन के लिए भी ठेका हासिल किया था।

फाइनेंसियल एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, एएआई ने बोली लगाने वाली कंपनियों द्वारा पेशकश किए गए प्रति-यात्री शुल्क (PPF) के आधार पर विजेता चुना था। बोली प्रक्रिया में अडानी ने सबसे अधिक प्रति यात्री शुल्क चुकाने का ऑफर रखा था।

प्रति यात्री शुल्क की बोली 85 से शुरू हुई और 171 रु में फाइनल हुई थी डील

अडानी ने फरवरी में हवाई अड्डों को विकसित करने के लिए लगाई जा रही बोली प्रक्रिया में अहमदाबाद एयरपोर्ट के लिए 177 रुपये प्रति यात्री शुल्क (पीपीएफ) का ऑफर किया था जबकि जीएमआर की बोली सिर्फ 85 रुपये थी।

जीएमआर को 2006 में एयरपोर्ट के निजीकरण प्रक्रिया के दौरान दिल्ली स्थित हवाई अड्डे का ठेका हासिल हुआ था। लखनऊ एयरपोर्ट के लिए जीएमआर के 63 रुपये की तुलना में अडानी ने 171 रुपये पीपीएफ का ऑफर पेश किया था और मंगलूरु के लिए जीएमआर के 18 रुपये की तुलना में अडानी ने 115 रुपये की पीपीएफ ऑफर पेश किया था।

इसी महीने कैबिनेट ने सार्वजनिक निजी भागीदारी के माध्यम से भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के तीन हवाईअड्डे अहमदाबाद, लखनऊ और मंगलुरु को पट्टे पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इन तीनों पर अडानी समूह ने 50 वर्षों की अवधि के लिए तीन हवाई अड्डों के संचालन के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाकर ठेका हासिल किया है।

ऐसे में ये साफ़ कहा जा सकता है कि सरकार भले ही पांच साल के लिए बनती हो। मगर ठेका 50 साल के लिए दिया जा रहा है। वाकई मेरा देश बदल रहा है और तेजी से निजीकरण की तरफ बढ़ रहा है।