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वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी को सूर्या समाचार से भी निकाला जा रहा है। कुछ महीने पहले ही पुण्य प्रसून बाजपेयी और 25 पत्रकारों की उनकी टीम को एबीपी न्यूज़ छोड़ना पड़ा था। जिसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार ज्वाइन किया। लेकिन अब सूर्या समाचार से भी पुण्य प्रसून की विदाई हो रही है। शायद सूर्या समाचार बाजपेयी की पत्रकारिता का ताप सह नहीं पाया।

सूर्या समाचार ने नोटिस में लिखा कि, ‘मैनजमेंट के निर्णय के अनुसार आपको सूचित किया जाता है की आपकी सेवाओं को कंपनी से अलग किया जा रहा है। कृपया 31 मार्च, 2019 को कंपनी में काम करने का अंतिम दिन माने। आपके सभी भुगतान कर दिए जाएंगे।’

पुण्य प्रसून बाजपेयी कई न्यूज़ चैनलों और अखबारों मे अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने आज तक, जनसत्ता, लोकमत और एनडीटीवी में काम किया है। यानी पत्रकारिता में एक लंबा सफर तय कर चुके हैं।

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एबीपी न्यूज़ पर पुण्य प्रसून बाजपेयी का शो ‘मास्टरस्ट्रोक’ काफी हिट हुआ था। शो पर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी योजनाओं की विफलता को लगातार दिखाया जा रहा था। यह बात सत्ताधीशों को पसंद नहीं आयी और उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इसे लेकर उस वक्त बहुत विवाद भी हुआ था।

एक के बाद एक तीन चैनलों से निकाले जाने के बाद पुण्य प्रसून बाजपेयी की तुलना सीनियर आईएएस अफसर अशोक खेमका से की जाने लगी है। अपने 27 साल के करियर मे अशोक खेमका का 52 बार तबादला हो चुका है। उन्हें विसेल ब्लोअर कहा जाता है।

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मशहूर कार्टूनिस्ट मंजुल ने पुण्य प्रसून की तुलना अशोक खेमका से करते हुए ट्विटर पर लिखा है कि देश में चौकीदार का आतंक चल रहा है। उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘खबर आ रही है कि पुण्य प्रसून जी को हाल ही मे मिली नौकरी से भी जाना पड़ा। चौकीदारों का ऐसा आतंक है कि पत्रकारों की हालत अशोक खेमका जैसी हो रखी है।’

यह कहने में बिल्कुल भी संकोच नहीं होना चाहिए कि मोदीराज में पत्रकारिता करना मुश्किल हुआ है। अब इस पेशे में जो सत्ता की बोली नहीं बोल रहा उसकी राह मुश्किल हो गई है। सरकार की जरा सी आचोलना पत्रकारों की नौकरी से लेकर जान तक ले रही है।