सिद्धार्थ रामू

पहली बार हिंदू राष्ट्र के जहर को संविधान के भीतर भरा गया- संदर्भ कैब

महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद के हस्ताक्षर करते ही हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को पहली बार संवैधानिक दर्जा देकर कानूनी हैसियत प्रदान कर दिया गया। जिस हिंदू राष्ट्र को हर कीमत पर रोकने की बात डॉ. आंबेडकर ने की थी।

डॉ. आंबेडकर ने साफ शब्दों में कहा था- ““अगर हिन्दू राज हकीकत बनता है, तब वह इस मुल्क के लिए सबसे बड़ा अभिशाप होगा। हिन्दू कुछ भी कहें, हिन्दू धर्म स्वतन्त्रता, समता और बन्धुता के लिए खतरा है। इन पैमानों पर वह लोकतन्त्र के साथ मेल नहीं खाता है। हिन्दू राज को किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए।”
– डॉ. आंबेडकर (पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इण्डिया, पृ.338)

जिस तरह नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया। करोड़ों लोगों के जीवन को मुश्किल हालात में पहुंचा दिया। उसी तरह नया नागरिकता कानून भारतीय राष्ट्र-समाज के ताने-बाने को तहस-नहस करेगा। इसके लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं।

आरएसएस की हिंदू राष्ट्र की चाहत और पूरे राष्ट्र के संसाधनों पर कब्जा करने की अड़ानी-अंबानी के चाहत का आपस में गठजोड़ हो गया है। यह गठजोड़ देश को बर्बरता और अराजकता की ओर लेकर जायेगा।

वैकल्पिक दुनिया की चाह रखने वालों के पास इस गठजोड़ को परास्त कर एक आधुनिक समता, स्वतंत्रता, बंधुता आधारित लोकतांत्रिक भारत के निर्माण का विकल्प ही बचा है।

इसकी वैचारिकी फुले,पेरियार, आंबेडकर राहुल सांकृत्यायन और भगत सिंह के विचारों के आधार पर ही खड़ी की जा सकती है।

हम जाति, पितृसत्ता और पूंजीवाद के विनाश बिना आधुनिक भारत का निर्माण नहीं कर सकते हैं। इसी संदर्भ आंबेडकर ने ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद को मेहनतकशों के सबसे बड़े दुश्मन के रूप में देखा था। आज ब्राह्मणवाद ( जाति और जातिवादी पितृसत्ता) और पूंजीवाद ने आपस में पूरी तहर गठजोड़ कायम कर लिया है।

पूंजीवाद ब्राह्मणवाद की रक्षा कर रहा है और ब्राह्मणवाद पूंजीवाद की रक्षा कर रहा है। भारत का पूंजीवाद पूरी तरह जातिवादी है, जिस तरह भारत का ब्राह्मणवाद पूंजीवादी हो चुका है।

(ये लेख सिद्धार्थ रामू के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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