Ritesh Pandey

कल योगी आदित्यनाथ की सरकार ने घोषित किया कि राज्य में 10 जुलाई से लेकर 13 जुलाई तक के लिए फिर से लॉकडाउन लगाया जा रहा है और 10 जुलाई की सुबह ही खबर आती है कि कुख्यात अपराधी विकास दुबे की कथित एनकाउंटर में हत्या कर दी गई।

इस इनकाउंटर पर तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि पुलिस प्रशासन द्वारा बताई जा रही फिल्मी कहानी पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपराधियों की नेताओं से साठगांठ पर सवाल उठाया है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।

मामले को आगे बढ़ाते हुए बसपा सांसद और लोकसभा में बसपा सांसद दल के नेता रितेश पांडेय ने इस कथित एनकाउंटर का लॉकडाउन कनेक्शन जोड़ा है। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा- आज सुबह विकास दुबे की पुलिस हिरासत में हुए एंकाउंटर से सीधा यह सवाल उठता है कि क्या 3 दिन का लॉक्डाउन इसी के लिए घोषित किया गया था? क्योंकि अगर 3 महीने के लॉक्डाउन से कोविड-19 की गति नहीं थमी, तो 3 दिन के लॉक्डाउन से सरकार की क्या ख़ास अपेक्षा थी?

एक अन्य ट्वीट करते हुए वह आगे लिखते हैं-2. अपराधी अदालत में क्यों नहीं पेश किया गया? हमारा संविधान कानून के शासन का आश्वासन देता है, अर्थात कानून हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू होता है, वो सरकार हो या अपराधी हो। ऐसे दौर में जब सरकार ख़ुद ही जज, जूरी, और जल्लाद बन जाए, तो देश के न्यायपालिका की ज़रूरत ही क्या है?

गौरतलब है कि विकास दुबे उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया था जानकार बताते हैं कि इसे पूरी तरह से सरेंडर माना जा चाहिए। इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जो व्यक्ति सरेंडर किया है वो हथियार छीन कर भागने की कोशिश क्यों करेगा?

संभवतः इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द गर्म होती प्रदेश की राजनीति पर लगाम लगाने के लिए योगी आदित्यनाथ ने लॉकडाउन लगाया है। नहीं तो इतने कम समय के लिए लॉकडाउन का कोई अर्थ नहीं निकलता है।

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