योगीराज में हर रोज हो रहे जघन्य अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिसमें सबसे ज्यादा तकलीफ वंचित समाज के लोगों को उठानी पड़ रही है। कहीं अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं, कहीं पुलिस ही अपराधी बन जा रही है तो कहीं मनबढ़ हत्यारे लाश को बीच बाज़ार फेंककर जा रहे हैं। चंदौली और ललितपुर की घटना से उत्तर प्रदेश की सियासत गरमाई ही थी कि इसी बीच जौनपुर में एक SC युवक की हत्या का मामला सामने आया है।

मृतक जीतलाल गौतम की मां की तरफ से पुलिस को दिए गए शिकायत पत्र के मुताबिक, “8 मई की रात साढ़े आठ बजे घर से निकले जीतलाल का पहले मोबाइल बंद पाया गया, रातभर खोजबीन के बाद सुबह बाज़ार में उसका शव मिला। अज्ञात हत्यारों के खिलाफ़ FIR दर्ज करके कार्यवाई की जाए।”

पुलिस के इसी रवैए पर नाराज़ होते हुए मृतक के भाई, सामाजिक कार्यकर्ता सूरज बौद्ध ने लिखा – “थानाक्षेत्र मीरगंज में मेरे चचेरे भाई की हत्या हुई है। पुलिस अधिकारी कार्यवाही करने के बजाए शव को जबरन उठाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या SC व्यक्ति की हत्या का कोई मोल नहीं है?”

फिर आगे मामले पर अपडेट देते हुए सूरज लिखते हैं: “आखिरकार जौनपुर पुलिस ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया और मेरे भाई के शव को परिजनों से छीनकर लेकर चली गई। निर्मम UP पुलिस!”

घटना और पुलिस प्रशासन के रवैए पर प्रतिक्रिया देते हुए बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने लिखा – “सूरज, ये बेहद दुःखद खबर है,कुदरत आपके भाई को शांति दे। मैं@uppolice से पूछना चाहता हूँ कि क्या उन्होंने प्रशासनिक कार्य करने के संकल्प को छोड़ दिया है? ना आपसे सुरक्षा हो रही है और ना आपका खौफ है मुजरिमों में। क्या ऐसे ही खौफ में हमारा समाज जीता रहेगा?”

एक अन्य ट्वीट में पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए आकाश आनंद लिखते हैं – “भाई @SurajKrBauddh से अभी फोन पर बात हुई। मैं दुख की इस घड़ी में उनके और उनके परिवार के साथ हूं। यूपी पुलिस से साफ़ कह देना चाहता हूँ कि हमारे समाज पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाई जीतलाल के दोषियों को जल्द गिरफ़्तार कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।”

दरअसल योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही आपराधिक घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी से ऐसा लग रहा है कि पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था का राज कायम करने में नाकाम हो रही है। प्रदेश के चारों तरफ से हत्या और बलात्कार जैसी घटनाओं की खबरें आ रही हैं मगर ज्यादातर मीडिया सवाल करने के बजाय सरकार की वाहवाही करने में लगी है, दिन रात मंदिर मस्जिद विवाद पर बहस कर रही है।

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