लीना मणिमेकलई की फिल्म ‘काली’ पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी विवाद पर बहस के दौरान अब भाजपा नेता और राज्य सभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आईआईएमसी, जेएनयू और एफटीआईआई को ‘ज़हर का पौधा’ घोषित कर दिया है।

दरअसल, शुक्रवार को आजतक के लाइव शो डिबेट में सुधांशु त्रिवेदी ने आईआईएमसी, जेएनयू और एफटीआईआई को ही ‘ज़हर का पौधा’ बुलाया और कहा ” हज़ारों फिल्में हर साल बनती हैं।

ज़्यादा नहीं 10 फिल्में दिखा दीजियेगा 1970 के बाद, जबसे वामपंथियों का सपोर्ट लेकर इंदिरा गाँधी ने सरकार बनाई और ये जेएनयू बना, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन बना। जो पौध उन्होंने लगाई थी उसी का ज़हर निकल कर सबके सामने आ रहा है। ”

आजतक चैनल पर कल रात ये लाइव डिबेट लीना मणिमेकलई की आने वाली फिल्म ‘काली’ के सन्दर्भ में चल रही थी।

आपको बता दें कि लीना मणिमेकलई की फिल्म ‘काली’ के हाल ही में निकाले गए पहले पोस्टर में एक महिला हिन्दू देवी काली के रूप में सिगरेट पीते नज़र आ रही है।

इस पोस्टर के निकलने के बाद से ही कई लोगों में गुस्सा है और हिन्दुओं की भावनाओ को ठेस पहुंचाने की कोशिश के तहत लीना के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है।

हालाँकि, लीना कहती हैं “मेरी काली क़्वीर है, एक मुक्त आत्मा है जो पितृसत्ता पर थूकती है। वह हिन्दुत्व को नीचे गिरा सकती है और पूंजीवाद को बर्बाद कर सकती है।”

‘काली’ फिल्म के पोस्टर को निकले आज पूरे 8 दिन होने को है। लीना ने 2 जुलाई को अपने ट्विटर अकाउंट पर जाकर अपने नई फिल्म के आने की सूचना सभी को दी थी ।

उन्होंने लिखा था ” आज @AgaKhanMuseum में “रिथिम ऑफ कनाडा” के हिस्से के रूप में मेरी हालिया फिल्म के लॉन्च को साझा करने के लिए मैं सुपर रोमांचित हूँ।”
हालाँकि, अब इस ट्वीट को ट्विटर प्लेटफार्म से हटा दिया गया है।

भारत में धर्म के नाम पर हो रही पॉलिटिक्स किसी की नज़रो से छुपी नहीं रही है मगर ये जानना मज़ेदार रहेगा कि जिस चैनल में आकर सुधांशु जेएनयू और आईआईएमसी को ज़हर का पौधा बता रहे थे, उसी आजतक के एंकर रिपोर्टर से लेकर चैनल के नीति निर्माता तक इन्हीं संस्थानों से पढ़कर निकले हैं। खुद भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता इन्हीं संस्थानों की देन हैं। उदाहरण के तौर पर, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जेएनयू की छात्रा रही हैं।

इस मुद्दे पर पत्रकार उत्कर्ष सिंह ट्वीट कर लिखते हैं ” सुधांशु त्रिवेदी ने IIMC, FTII और JNU को ‘जहर का पौधा’ कहा है. हैरानी इस बात पर हो रही है कि जिस चैनल पर बैठकर वो ये सब कह रहे हैं, उस चैनल के सम्पादक से लेकर एंकर, रिपोर्टर, प्रोड्यूसर समेत न जाने कितने ही कर्मचारी IIMC-JNU से पढ़कर आए हैं. क्या कोई उनके बयान पर आपत्ति जताएगा?”

सुधांशु त्रिवेदी की इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए एक ट्विटर यूजर उग्रनाथ झा लिखते हैं- “सुधांशु जी JNU अगर जहर का पौधा है तो उसी जहरीले पौधे का फल

वित्त मंत्री 
विदेश मंत्री
नीति आयोग के Ex ceo
15 से ज्यादा पदासीन भारतीय राजदूत, आगे गिनती बहुत है। सही कहा त्रिवेदी जी इसी जहरीले फलों ने देश को बर्बाद करके रख दिया है।

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