10 फरवरी ,गुरूवार को राज्यसभा में भाजपा सांसद के. जे. अलफ़ोंस ने कहा कि अंबानी और अडानी जैसे कारोबारियों की पूजा की जानी चाहिए क्योंकि ये रोज़गार पैदा करते हैं।

दरअसल,संसद का बजट सत्र जारी है। इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पिछले तीन साल में करीब 10 हजार लोगों ने बेरोजगारी की वजह से आत्महत्या कर ली है।

इस बयान के बाद विपक्षी सांसदों ने बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी को लेकर केंद्र सरकार को जमकर घेरा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस हुई। इसी दौरान बीजेपी सांसद के. जे. अल्फोंस ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “आप मुझ पर पूंजीपतियों का पैरोकार होने का आरोप लगा सकते हैं। जिन लोगों ने देश में रोज़गार पैदा किया है, मैं उन लोगों का नाम लेता हूँ, क्योंकि आपने उनका नाम लिया है। चाहे रिलायंस हो, अंबानी हो, अडानी हो, कोई भी हो…उनकी पूजा होनी चाहिए। हाँ, क्योंकि ये नौक़रियां देते हैं। वे लोग जो निवेश करते हैं, अंबानी-अडानी, इस देश में पैसा कमाने वाला हर उद्योगपति रोज़गार पैदा करता है। उन्होंने नौक़रियां दी हैं, उनका सम्मान करने की ज़रूरत है।”

वैश्विक असामनताएं का जिक्र करते हुए के. जे. अल्फोंस कहते हैं, ”विपक्ष कहता है कि दो लोगों की संपत्ति बढ़ी है। एलन मस्क की संपत्ति 1016 फीसदी बढ़ गई है, क्या आपको इसकी जानकारी है? गूगल के संस्थापक की संपत्ति में भी 126 फीसदी का इजाफा हुआ है। बेजोस की संपत्ति में भी 67 फीसदी का इजाफा हुआ है। वैश्विक असमानता एक सच्चाई है, चाहे आप इसे स्वीकार करें या न करें। दुनिया में तीन बिलियन लोग एक दिन में पांच डॉलर से भी कम में अपना जीवन यापन करते हैं।”

बयान पर विवाद होने के बाद के. जे. अलफ़ोंस ने सफाई दी। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अलफ़ोंस ने कहा, ”रोजगार का बड़ा हिस्सा प्राइवेट सेक्टर से आता है। इसलिए मैंने कहा कि हमें ऐसे लोगों का सम्मान करने की जरूरत है जो नौकरियां पैदा करते हैं-चाहे वह अंबानी हों, अडानी हों, टाटा हों या चाय बेचने वाले हों। उनका सम्मान और पूजा की जानी चाहिए।”

बता दें कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए संसद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर देश को अमीर और ग़रीब भारत में बांटने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार की वजह से भारत में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं। अमीरों और ग़रीबों के बीच ख़ाई बढ़ती जा रही है। देश की 40 फ़ीसदी आमदनी सिर्फ़ कुछ पूंजीपतियों के पास है।

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