केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी गौरक्षा और गौमांस के नाम पर जमकर राजनीति करती आई है। गौरक्षा के नाम पर देश के अल्पसंख्यकों को अक्सर प्रताड़ित किया जाता रहा है।

साल 2014 के बाद अब तक ऐसी कई घटनाएं देखने को मिल चुकी है। जिसमें बीफ ले जाने और खाने के शक के आधार पर मुसलमानों की मॉब लिंचिंग हो चुकी है।

इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी के कई नेता बीफ को लेकर विवादित बयान भी दे चुके हैं।

इसी कड़ी में मेघालय सरकार में मंत्री और भाजपा नेता सनबोर शूलाई के एक बयान से हंगामा मच गया है।

उन्होंने अपने राज्य की जनता को बीफ खाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश में अपने पार्टी की विचारधारा का सीधे तौर पर विरोध किया है।

राज्य सरकार में मंत्री सनबोर शूलाई ने कहा है कि लोग मुर्गा, बकरा और मीट, मछली खाने की जगह बीफ ज्यादा खाएं।

बीते हफ्ते ही सनबोर शूलाई ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली है। उनका कहना है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को अपने मन के हिसाब से खाने की स्वतंत्रता है। इसलिए जिसे जो मन करता है। वह खा सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि लोगों को बीफ ज्यादा खाने के लिए प्रोत्साहित करने से यह धारणा टूट जाएगी कि भारतीय जनता पार्टी गौहत्या पर प्रतिबंध लगाएगी।

इस कड़ी में उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से बात करके यह सुनिश्चित करने की बात भी कही है कि मेघालय में मवेशी परिवहन पड़ोसी राज्य में गायों को लेकर नए कानून से बिल्कुल भी प्रभावित ना हो पाए।

दरअसल असम की सरकार द्वारा हाल ही में गौ संरक्षण विधेयक 2021 लाया गया है। जिसके तहत बांग्लादेश में गौ तस्करी को कंट्रोल करने के लिए असम के जरिए गौमांस के इंटरनेशनल एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाया जाने वाला है।

इससे पहले कई अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी गौ तस्करी और गौहत्या को रोकने के लिए कानून बनाए जाने पर विचार विमर्श किया जा रहा है।

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