यूपी सरकार ने महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के नाम पर भाजपा की एक नेत्री को चुना है जिनका इन कामों से दूर दूर तक कोई सरोकार नहीं है। दरअसल हाथरस से भाजपा पार्षद बबिता वर्मा को “मिशन शक्ति प्रोग्राम” के तहत अवार्ड दिया गया है।

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ये वही बबिता वर्मा है जिनके खिलाफ़ पुलिस ने पिछले हफ्ते एक महिला की पिटाई करने और उसे धमकी देने के आरोप में केस दर्ज किया था। और ये वही मिशन शक्ति प्रोग्राम है जिसका उद्देश्य है कि यूपी में महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। लेकिन सरकार द्वारा एक महिला को असुरक्षित महसूस करवाती भाजपा नेत्री को ही सम्मानित किया जा रहा है।

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TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 अक्टूबर को बबिता वर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो रुक्मणि नाम की एक महिला को पीटते हुए दिखाई दे रही थी। आरोप है कि रुक्मणी कुछ पुरुषों का विरोध कर रही थी जो उसके किराए के घर की दीवार को गिरा रहे थे। रुक्मणि की बात सुनने के बजाए बबिता वर्मा उसे पीटने लगी।

बबिता वर्मा के खिलाफ़ IPC की धारा 147, 323, 448 और 506 केस भी दर्ज किया गया है। हैरानी की बात तो ये है कि सरकार ने ऐसी महिला को सशक्तिकरण के प्रोग्राम के तहत सम्मानित किया है जो दूसरी महिलाओं का ही सम्मान नहीं करती। ऐसा कोई मिशन तो औरतों और बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके सशक्तिकरण की और काम करने के लिए बनता है। लेकिन अब लग रहा है कि ये समाज के आगे सही उदाहरण नहीं पेश कर रहा है।

पिछले कुछ सालों में भाजपा सरकार ने हर चीज की परिभाषा बदल दी है। हिंसा के पुजारियों को शांति का दूत बना दिया है, सांप्रदायिक लोगों को समरसता का प्रतीक बना दिया है और महिला विरोधी लोगों को महिलाओं की तमाम जिम्मेदारी दे दी है। यानी भाजपा ने हर वो काम किया है जिसमें विरोधाभास, दिखावा और छलावा हो।

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