प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की बिगड़ती स्वास्थ्य सेवा पर मौन धारण कर रखा है। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की लगातार ख़राब कानून व्यवस्था पर भी खामोश है। एक बात ये भी है कि हर समस्या के लिए प्रधानमंत्री मोदी को दोष देना सही नहीं। मगर ये भी सच है की हर छोटी सी छोटी घटना पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने वाले मोदी इसपर बिलकुल चुप्पी साधे हुए है।

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा चुनाव के वक़्त बिहार के 13 दौरे किये थे। जिनमें विकास सुशासन, दुरुस्त शिक्षा चिकित्सा की बात अपने भाषणों में कही थी। ये भी सच है कि आयुष्मान भारत योजना के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी ने खूब वोट बटोरे है।

ऐसे में जब बच्चे मर रहे है तो वो चिंता या जनता को हिम्मत देने के लिए भी एक ट्वीट या सन्देश नहीं दे पाए है। जबकि बीजेपी बिहार में गठबंधन की साथी है और वहां स्वास्थ मंत्रालय भी बीजेपी के खाते में आता है।

चुनाव के समय 13 बार ‘बिहार दौरा’ करने वाले साहेब 100 बच्चों की मौत पर खामोश क्यों है? : रतन लाल

भले ही प्रधानमंत्री अभी खामोश है मगर उम्मीद है कुछ दिनों बाद शायद सोशल मीडिया पर कुछ लिख दे। मगर फ़िलहाल के लिए उन्हें बिहार का दौरा करना चाहिए। उन्हें देखना चाहिए की देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को कितना दुरुस्त करने की ज़रूरत है। सिर्फ आयुष्मान भारत का डंका पीटने भर से काम नहीं चलेगा, अस्पतालों में दवाएं और बेड की ज़रूरत पड़ती है।

पीएम मोदी की इस खामोशी पर राजद नेता अरुण कुमार यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, बिहार के मुज़फ्फपुर में इंसेफेलाइटिस से 100 बच्चें मरने वाले हिंदुस्तान के है पाकिस्तान के नही?

अधिकतर मरने वाले गरीब हिंदुओं के बच्चें है फिर भी एक ट्वीट कर भी संवेदना व्यक्त नही कर सके। शायद इसलिए कि अभी चुनाव नही है ? बेहद संवेदनहीनता