उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आचार सहिंता का उल्लंधन जारी है। कहीं वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैकड़ों लोग जुटाए जा रहे हैं, तो कहीं डोर टू डोर कैम्पेन के नाम पर रोड शो निकाला जा रहा है।

आज ही गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिमी यूपी के कैराना सीट पर कथित डोर टू डोर कैम्पेन किया है। अमित शाह के डोर टू डोर कैम्पेन में जहां तक आँखें देख सकती हैं, वहां तक सिर्फ लोग ही लोग नज़र आ रहे थे। ज्यादातर लोग बिना मास्क थे। खुद अमित शाह भी बिना मास्क ही लोगों से मिल रहे थे। हाथ मिला रहे थे। पर्चा बांट रहे थे। गमछा ले रहे थे। सबका अभिवादन कर रहे थे।

इतना ही नहीं कैराना की तंग गलियों में अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ अमित शाह छोटे-छोटे बच्चें से माला और गमछा पहनते नज़र आए, तो कहीं कही बच्चों को मिठाई खिलाते नजर आए। बुगुर्गों से भी मिलना जुलना खूब हुआ।

कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि अमित शाह जितने लोगों की जिंदगी खतरे में डाल सकते थे। डाल दिया। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर चुनाव आयोग के नियम-कायदों की धज्जियां भी उड़ा दी।

अमित शाह ने जिस डोर टू डोर कैम्पने के नाम पर ये सब किया है, उस डोर टू डोर कैम्पने को सिर्फ पांच लोगों के साथ करना था। लेकिन अमित शाह की सुरक्षा में ही 10 से ज्यादा लोग मौजूद थे। ऐसे में अमित शाह ये भी नहीं कह सकते कि वो तो डोर टू डोर कैम्पेन ही कर रहे थे, लेकिन लोग अपने आप साथ चलने लगे।

अमित शाह के कथित डोर टू डोर कैम्पने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। विपक्षी दलों के तमाम नेता चुनाव आयोग से सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन चुनाव आयोग चुप्पी निष्पक्ष चुनाव के दावे को मुंह चिढ़ा रहा है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने ट्विटर पर तंज करते हुए सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा है, माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी “5 लोग” के साथ डोर-टू-डोर अभियान कर रहे हैं। चुनाव आयोग को उन्हें “डोर-टू-डोर” अभियान का ब्रांड एम्बेसडर घोषित कर उनके वीडियो को DEMO बना देना चाहिए। वरना चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल जारी रहेंगे। FIR सिर्फ कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री पर क्यों?

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