डॉक्टर पायल तडवी की आत्महत्या ने देश मे एक बार फिर जातीय बहस को जीवित कर दिया है। 26 साल की पायल मुंबई के बीवाईएल अस्पताल मे काम करती थीं। अपने सीनियर द्वारा उत्पीड़न और जातिगत टिप्पणियों से तंग आकर पायल ने हॉस्टल के कमरे मे खुद को फांसी लगा ली। पायल ने अपने साथ हो रहे उत्पीड़न का ज़िक्र अपने कजिन और माता पिता से किया था।

परिवार का कहना है कि 10 मई को उन्होंने पायल के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की शिकायत अस्पताल प्रशासन से की थी। मगर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

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ऐसा ही कुछ तीन साल पहले भी देखने को मिला था। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे रोहित वेमुला ने ख़ुदकुशी कर ली थी। दलित और कथित नीची जातियों के शोषण के चलते रोहित और पायल जैसे अनेकों छात्र खुदखुशी की भेंट चढ़ जाते हैं।

देश के अलग-अलग कोनों से पायल के लिए आवाज़ उठ रही है। आलोचकों की प्रशंसा पा चुकी फिल्म ‘अनारकली ऑफ़ आरा’ के लेखक और निर्देशक अविनाश दास ने रोहित वेमुला और पायल को समर्पित ट्वीट लिखा। इस ट्वीट मे उन्होंने समाज पर टिप्पणी की।

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अविनाश ने ट्विटर पर लिखा- हम रोहित वेमुला के लिए इंसाफ़ की लड़ाई क़ायदे से लड़ पाये होते, तो डॉ पायल तडवी आज भी ज़िंदा होतीं? बेहद थका देने वाला और उदासी से भरा दौर है। हमला करने वालों में भी हम ही हैं और मारे जाने वालों में भी हम ही। क्या किसी के पास थोड़ा सा पानी, थोड़ी सी रोशनी है?