केंद्र की मोदी सरकार भले ही नोटबंदी के फैसले को ग़लत मानने को तैयार न हो, लेकिन इससे जुड़े तकरीबन तमाम लोगों ने मोदी सरकार के इस कदम को ग़लत बताया है। अब पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने नोटबंदी पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

अरविंद सुब्रमण्यन ने नोटबंदी को मोदी सरकार का काफी सख्त और अर्थव्यवस्था को झटका देने वाला फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि इससे जीडीपी ग्रोथ रेट सात महीने के सबसे निचले स्तर 6.8% पर पहुंच गई थी, जबकि नोटबंदी से पहले यह 8% थी।

‘ऑफ काउंसिल: द चैलेंजिस ऑफ मोदी-जेठली इकोनोमी’ शीर्षक से अपनी किताब में सुब्रमण्यन ने लिखा है कि नोटबंदी देश पर एक बहुत बड़ा मौद्रिक झटका था।

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उन्होंने नोटबंदी की आलोचना करते हुए लिखा कि इससे देश की विकास दर में गिरावट आई और यह सिलसिला अगली सात तिमाहियों तक जारी रहा।

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने लिखा है कि एक झटके में देश की 86 फीसदी नकदी को चलन से बाहर करने से जो हाल हुआ सबको पता है। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि आधुनिक समय में कोई भी देश इस तरह का फैसला नहीं कर सकता।

अरविंद सुब्रमण्यन की किताब जल्द ही आने वाली है। वे इन दिनों हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में गेस्ट फैकल्टी है और पीटरसन इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो हैं।

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उन्होंने फैसले के राजनीतिक पहलू पर लिखा है कि यह एक अभूतपूर्व फैसला था जो आधुनिक समय में किसी भी देश ने नहीं किया है। उन्होंने लिखा है कि आमतौर पर धीरे-धीरे पुराने नोटों को सिस्टम से हटाया जाता है और सिर्फ युद्ध, मुद्रा संकट या राजनीतिक उथल-पुथल के समय ही ऐसे फैसले किए जा सकते हैं।

बता दें कि इससे पहले आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने आर्थिक मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने माना कि नोटबंदी के चलते अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा।

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