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पिछले दिनों भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान राफेल का ठेका लेने वाले अनिल अंबानी मुश्किलों में घिर गए। जिसे लेकर रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) के को-फाउंडर अनिल अंबानी अवमानना मामले में दोषी पाए गए थे। इस मामले में अनिल अंबानी का जेल जाना लगभग तय हो गया था।

मगर अनिल अंबानी के लिए मुकेश अंबानी राम बनकर उनके सामने प्रकट हुए और उनका 550 करोड़ रुपए चुका दिया। जेल जाने का खतरा जो सिर पर मंडरा रहा था वो अब टल गया क्योंकि उनके भाई मुकेश अंबानी ने उनके पैसे दे दिए।

अब अहम सवाल ये है कि क्या ऐसे शख्स को राफेल का ठेका दिया जाना चाहिए जो दिवालिया हो चुका हो? क्या प्रधानमंत्री मोदी जो राफेल डील को घोटाला बताने पर विपक्ष को झूठा करार दे रहे हैं क्या वो इस बात से भी मुंह फेर लेंगे कि अनिल अंबानी कर्जे में डूबे हैं। भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब कर्जदार एक लड़ाकू विमान बनाएगा।

सवाल ये भी उठता है कि पीएम मोदी जिस चौकीदार शब्द को भुनाने में लगे हैं वो शब्द अपने आप में सुरक्षा की गारंटी देता है। उसी नाम को इस्तेमाल कर चौकीदारी की पूरी परिभाषा ही बदल देने की कोशिश जारी है।

होली से एक दिन पहले पीएम मोदी 25 लाख चौकीदारों से रेडियो के माध्यम से बात कर रहें है। मगर क्या वो इस मौके पर जनता को ये जवाब दे सकते हैं कि उनसे चौकीदारी नहीं हो पाई।

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चाहे वो राफेल डील का मामला हो या फिर नीरव, मेहुल और विजय माल्या जैसे कई कारोबारियों का भाग जाना जो भारतीय बैंकों को करोड़ो का चूना लगाकर विदेश चले गए और सरकार उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया में लाखों करोड़ और फूंक रही है।

बीजेपी कहती है कि इस बार का लोकसभा चुनाव राष्ट्रवाद बनाम आतंकवाद पर लड़ा जायेगा जिसे मैं भी चौकीदार प्रचार के जरिए कहा जाता है ‘मैं सरहदों के हौंसलों के साथ एक हुंकार हूं, हां #MainBhiChowkidar हूं’। अब ये जनता को सोचना और समीक्षा करना है कि उनके लिए सही क्या है और गलत क्या।

लेकिन पीएम मोदी से यह सवाल ज़रूर होना चाहिए कि जो दूसरे देश की कंपनी का पैसा न चुका पाया हो उसका क्या भरोसा है कि वो राफेल विमान ईमानदार से बनवाएगा और देश के वायुसैनिक सुरक्षित रहेंगें।

वैसे कांग्रेस इस बात का दावा करती रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर ही अनिल अंबानी की नई कंपनी रिलायंस एयरोस्ट्रक्टर लिमिटेड को राफेल डील में आफ़सेट पार्टनर बनाया गया। अब अनिल अंबानी की कंपनी में ऐसी खूबी थी जो अनुभवी HAL को नज़रअंदाज़ कर ज्यादा अहमियत रिलायंस को दी गई? चौकीदार उर्फ़ प्रधानमंत्री मोदी को इसका जवाब देना अभी बाकी है।