उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में ज़मीन पर कब्ज़ा करने को लेकर भू-माफियाओं ने 10 गोंड आदिवासियों पर फायरिंग कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद ट्विटर पर ‘यूपी में जंगलराज’ (#UPmeinJungleRaj) ट्रेंड करने लगा। लेकिन देश के मेनस्ट्रीम मीडिया में आदिवासियों के इस नरसंहार पर कोई ख़ास चर्चा देखने को नहीं मिली।

जिस वक्त सभी चैनलों को सोनभद्र के पीड़ितों के साथ खड़े होकर कानून-व्यवस्था की नाकामी को लेकर सरकार से सवाल पूछने चाहिए थे, उस वक्त चैनल घुसपैठियों को भगाने में अपना दम-ख़म झोंकते नज़र आ आए। न्यूज़18 इंडिया के शो आर-पार में चर्चा सोनभद्र के नरसंहार पर नहीं, बल्कि भारत में घुसपैठियों पर हुई।

ख़ुद को देश का सबसे बड़ा डिबेट शो बताने वाले आर-पार में बहस इस बात पर हुई कि घुसपैठियों से इंच-इंच ज़मीन वापस कैसे ली जाए। शो के पोस्टर में गृहमंत्री अमित शाह, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और AIMIM चीफ़ असदुद्दीन ओवैसी की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया।

दरअसल, अमित शाह ने दो दिन पहले लोकसभा में NRC को लेकर पूछे गए सवाव के जवाब में  कहा था कि देश की इंच-इंच जमीन से अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित किया जाएगा। अमित शाह के साथ पोस्टर में ममता बनर्जी और असदुद्दीन ओवैसी की तस्वीरों का इस्तेमाल इसलिए किया गया है, क्योंकि ये दोनों नेता NRC पर सवाल उठाते रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले जब NRC की लिस्ट जारी की गई थी, तो उसमें 40 लाख लोगों को घुसपैठिया बताया गया था। NRC की लिस्ट में कई स्वतंत्रता सेनानी, विधायकों और पूर्व राष्ट्रपति के परिवार तक का नाम शामिल था। जिसपर सवाल उठाए गए थे।

अमित शाह अपने एक बयान में पहले ही यह बात साफ़ कर चुके हैं कि वह हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख शरणार्थियों के अलावा हर घुसपैठिए को देश से निकाल बाहर करेंगे। इसका मतलब साफ़ है कि उनके निशाने पर सिर्फ मुसलमान और ईसाई हैं।

किसी भी मुद्दे से मुसलमानों का नाम जुड़ना मात्र ही मीडिया के लिए काफी है। यहां तो मुसलमानों को कानूनी दांवपेंच से बाहर निकालने की बात हो रही है। ऐसे में यह मीडिया के लिए चर्चा का विषय न बने, ये मुमकिन ही नहीं।

शायद इसीलिए न्यूज़18 को आदिवासियों के नरसंहार से ज़्यादा अहम घुसपैठियों को बाहर करना लगता है। इसी वजह से चैनल सोनभद्र में हुए कत्लेआम पर बात न करते हुए NRC पर अपने सबसे बड़े शो में बहस करवाता है।

हालांकि सोनभद्र पर चर्चा न करने की एक वजह यह भी है कि यूपी में बीजेपी की सरकार है और गोदी मीडिया कहे जाने वाले चैनलों के लिए सत्ता से सवाल करना आसान नहीं। इन चैनलों के एंकर अपने शो में विपक्षियों से तो खुलकर सवाल कर लेते हैं, लेकिन ज़िम्मेदारों यानी सत्ता से सवाल करने में कतराते हैं। मौजूदा दौर में चैनलों का यह रवैया यकीनन शर्मनाक है।