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नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) के मुद्दे पर जहां तमाम मुस्लिम तंज़ीमें ख़ामोश हैं, वहीं अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी ने इसके ख़िलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार शाम को अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के मुताबिक, इस प्रदर्शन में हज़ारों की तादाद में छात्र सड़कों पर उतरे और इसे संविधान विरोधी बताते हुए वापस लिए जाने की मांग की। इस दौरान छात्रों ने CAB और इसे लाने वाली केंद्र की मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की।

इससे पहले सोमवार रात एएमयू छात्रों ने अपना विरोध जताते हुए विश्वविद्यालय कैंटीन पर सभा कर बिल की सांकेतिक प्रतियों को फूंक दिया था। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इस बिल की तुलना विभाजन से करते हुए कहा कि जो नागरिकता संशोधन बिल अमित शाह ने संसद में पेश किया है, वह वैसा ही है जैसे सन 1947 में देश का बंटवारा हुआ था।

छात्रों ने कहा कि बीजेपी चाहती है कि फिर से हिंदू और मुसलमानों का बंटवारा हो जाए। यह देश का दुर्भाग्य है कि गृहमंत्री अमित शाह मुसलमानों का नाम नहीं लेकर सीधे सीधे अन्य सभी का नाम ले रहे हैं। इससे साफ है कि गृहमंत्री मुसलमानों के खिलाफ हैं। इसलिए हम इस बिल को अस्वीकार करते हुए इसके ख़िलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (CAB)?

नागरिक संशोधन विधेयक 2019 के तहत सिटिजनशिप एक्ट 1955 में बदलाव का प्रस्ताव है। इस बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों (जैसे हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों) को आसानी से भारत की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है।

अभी भारत की नागरिकता के लिए यहां कम से कम 11 सालों तक रहना जरूरी है। लेकिन इस बिल के पास होने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता लेने के लिए 6 साल तक ही भारत में रहना होगा। लेकिन इस बिल में मुसलमानों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। फिलहाल ये बिल लोकसभा में 311-80 के बहुमत के साथ पास कर दिया गया है। अभी इसे राज्यसभा में पास होना बाकी है।

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