लखीमपुर खीरी हत्याकांड के करीब 90 दिन बाद SIT (Special Investigation Team) ने CJM कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट में चार्जशीट के पृष्ठों की संख्या (जो कि 5000 है) के आधार पर उसकी गंभीरता को बताने की कोशिश की जा रहा है।

हालांकि पृष्ठों की संख्या से अधिक पृष्ठों पर लिखे शब्द घटना की संगीनता को अधिक गंभीरता से बता रहे हैं। SIT के मुख्य जाँच अधिकारी विद्या राम दिवाकर ने लखीमपुर खीरी की घटना को गैर इरादतन हत्या मानने से इंकार कर दिया है।

विद्या राम दिवाकर ने चार्जशीट में लिखा है, ”संकलित साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ है कि अभियुक्तों ने आपराधिक कृत्य को लापरवाही एवं उपेक्षा से नहीं बल्कि जानबूझकर पूर्व नियोजित योजना के अनुसार अंजाम दिया है। इससे 5 लोगों की मौत हुई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। ये गैर इरादतन हत्या नहीं है। इनके खिलाफ हत्या और आपराधिक षडयंत्र का मुकदमा चलाया जाए।”

चार्जशीट में मुख्य आरोपी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष मिश्रा को बनाया गया है। यानी चार्जशीट आशीष मिश्रा को किसानों का हत्यारा मानता है। पहले इस मामले में 13 अभियुक्तों को आरोपी बनाया गया था। लेकिन अब चार्जशीट में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के रिश्तेदार वीरेंद्र कुमार शुक्ला का नाम भी जोड़ दिया गया है। वीरेंद्र कुमार शुक्ला पर साक्ष्य मिटाने की धारा 201 के तहत आरोप दायर किए गए हैं। इस तरह आरोपियों की संख्या 14 हो गई है।

बावजूद इसके किसानों के अधिवक्ता नाखुश हैं। किसानों की तरफ से इस मामले में मंत्री का भी नाम जोड़ने की प्रार्थना की गई, लेकिन उनका नाम नहीं जोड़ा गया है।

जबकि घटना के बाद किसानों द्वारा दी गई तहरीर में मंत्री अजय मिश्रा टेनी का नाम था। आम तौर पर जिन नामों को तहरीर दिया जाता है, वही नाम FIR में लिखना होता है। लेकिन शायद पुलिस ने चतुराई दिखाते हुए मंत्री अजय मिश्रा का नाम FIR में नहीं लिखा। और अब चार्जशीट में भी टेनी ‘महाराज’ का जिक्र नहीं है।

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PC- @Abhinav_Pan (Twitter)

बता दें कि 3 अक्टूबर को लखीमपुर में चार किसानों, एक स्थानीय पत्रकार समेत आठ लोगों की हत्या हुई थी। आशीष मिश्रा और उसके साथियों पर आरोप है कि वो फायरिंग करते हुए किसानों को अपनी गाड़ी से रौंदते हुए निकल गए थे।

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